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ईरान में बड़ा तख्तापलट? खामेनेई सिर्फ चेहरा, ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ के हाथ में सत्ता

Tehran (Iran): ईरान में साल की शुरुआत में भड़के विरोध प्रदर्शनों ने न केवल सड़कों पर असंतोष जाहिर किया, बल्कि दुनिया के सामने तेहरान की सत्ता का एक नया सच भी लाकर खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान के सुप्रीम

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Tehran (Iran): ईरान में साल की शुरुआत में भड़के विरोध प्रदर्शनों ने न केवल सड़कों पर असंतोष जाहिर किया, बल्कि दुनिया के सामने तेहरान की सत्ता का एक नया सच भी लाकर खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अब केवल एक प्रतीकात्मक मुखौटा रह गए हैं? वैश्विक जानकारों का मानना है कि ईरान की सत्ता की असली चाभी अब ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के हाथों में शिफ्ट हो चुकी है।

सेना से ‘सुपरपावर’ बनने का सफर: 1979 की क्रांति के बाद रक्षा के लिए बनाई गई IRGC अब महज़ एक सैन्य संगठन नहीं रही। इसके पास अपनी स्वतंत्र थल सेना, नौसेना, वायु सेना और एक बेहद खौफनाक खुफिया नेटवर्क है। बीते कुछ वर्षों में ईरान पर लगे वैश्विक प्रतिबंधों और आर्थिक संकट ने IRGC को और ताकतवर बना दिया है। आज स्थिति यह है कि नागरिक सरकार और सैन्य सत्ता के बीच का अंतर लगभग खत्म हो चुका है और कई पूर्व सैन्य कमांडर अब देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काबिज हैं।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर IRGC का ‘कब्जा’: IRGC की ताकत सिर्फ बंदूकों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रगों में भी इसी का खून दौड़ रहा है। ‘खतम अल-अंबिया’ जैसे विशाल व्यापारिक समूहों के जरिए यह संगठन ईरान के ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और निर्माण क्षेत्रों को नियंत्रित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधों ने निजी कंपनियों को खत्म कर दिया, जिसका सीधा फायदा गार्ड्स से जुड़े नेटवर्क को मिला।

उत्तराधिकारी का संकट और बढ़ता रसूख: अयातुल्ला खामेनेई अब 90 वर्ष के हो चुके हैं और उनके बाद कौन? इस सवाल का जवाब अभी तक अनिश्चित है। ऐसे में IRGC खुद को राजनीतिक स्थिरता की एकमात्र गारंटी के रूप में पेश कर रही है। अब राष्ट्रपति या कैबिनेट के पास केवल कागजी अधिकार रह गए हैं, जबकि बड़े रणनीतिक और विदेश नीति के फैसले गार्ड्स के मुख्यालय से लिए जा रहे हैं।

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तेहरान का भविष्य अब इस बात पर निर्भर नहीं करता कि राष्ट्रपति की कुर्सी पर कौन बैठेगा, बल्कि इस पर निर्भर है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अपनी पकड़ को कितना और मजबूत करते हैं। ईरान की यह बदलती तस्वीर आने वाले समय में न केवल मध्य-पूर्व (Middle East), बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति को प्रभावित करने वाली है।

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