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Interesting News: प्रकृति की संरचना इतनी जटिल और सटीक है कि विज्ञान भी अक्सर दांतों तले उंगली दबा लेता है। हम अक्सर देखते हैं कि मुर्गी का अंडा बाहर से पूरी तरह पत्थर जैसा सख्त और बंद नजर आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना किसी बाहरी मदद, भोजन या ताजी हवा के, एक नन्हा चूजा 21 दिनों तक उसके भीतर कैसे फलता-फूलता है? आज हम आपको बताएंगे अंडे की उस “हिडन इंजीनियरिंग” के बारे में, जो जीवन को संभव बनाती है।
अंडे का खोल: ठोस दीवार नहीं, बल्कि एक ‘फिल्टर’ है?
हमें ऊपर से ठोस दिखने वाला अंडे का सफेद खोल असल में हजारों छोटे दरवाजों से बना होता है। विज्ञान की भाषा में कहें तो अंडे की ऊपरी परत पर 7000 से भी ज्यादा माइक्रोस्कोपिक छेद होते हैं। ये छेद इतने छोटे होते हैं कि नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन इन्हीं के जरिए बाहर की ऑक्सीजन धीरे-धीरे अंदर दाखिल होती है। यह कुदरत का वह वेंटिलेशन सिस्टम है, जो चूजे को घुटने से बचाता है।
सांस लेने के लिए अंडे में होती है ‘खास झिल्ली’
अंडे के भीतर एक विशेष ‘कोरियोएलेंटोइक झिल्ली’ होती है, जो रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) से लदी होती है। यह झिल्ली अंडे के खोल की भीतरी सतह पर चिपकी रहती है और बाहर से आने वाली ऑक्सीजन को सोखकर सीधे चूजे के खून तक पहुंचाती है। वहीं, चूजे के शरीर से निकलने वाली जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को इसी रास्ते से वापस बाहर निकाल दिया जाता है।
पोषण और कचरे का प्रबंधन कैसे होता है?
अंडे के भीतर की जर्दी चूजे के लिए ऊर्जा का पावर हाउस है। इसमें मौजूद वसा और विटामिन चूजे के मस्तिष्क और अंगों का निर्माण करते हैं। वहीं, अंडे का सफेद हिस्सा मांसपेशियों के लिए प्रोटीन और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। मजेदार बात यह है कि चूजे द्वारा पैदा किया गया कचरा (वेस्ट प्रोडक्ट) ‘एलेंटोइस’ नामक एक अलग थैली में जमा होता रहता है, ताकि भ्रूण सुरक्षित रहे। अंडे के चौड़े हिस्से में एक छोटी ‘एयर सेल’ होती है, जिससे चूजा अपनी आखिरी सांस लेता है और फिर खोल तोड़कर नई दुनिया में कदम रखता है।

