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Social News: सोशल मीडिया का तेज़ असर एक बार फिर दिखा है, और इस बार इसकी चपेट में आ गईं मेघालय की युवा इंस्टाग्राम क्रिएटर स्वीट जन्नत। 19 मिनट 34 सेकंड का एक कथित प्राइवेट वीडियो अचानक वायरल कर दिया गया और कुछ ही घंटों में उनका नाम उसमें जोड़ दिया गया। मामला 27 नवंबर 2025 को शुरू हुआ और देखते-देखते पूरी इंटरनेट दुनिया में अफवाहों का सैलाब उमड़ आया।
सोशल मीडिया पर ‘19 मिनट’ वाले मैसेज की बाढ़
इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक और टेलीग्राम पर “लिंक भेजो”, “19 मिनट वाला वीडियो” जैसे मैसेज फैलने लगे। ट्रोल्स उनके हर पोस्ट पर अशोभनीय कमेंट करने लगे। जन्नत, जो आमतौर पर सरल लाइफस्टाइल वीडियो बनाती थीं, इस अचानक आए तूफान से पूरी तरह हिल गईं।
जन्नत का बयान—“यह लड़की मैं नहीं हूं”
अगले ही दिन यानी 28 नवंबर को उन्होंने वीडियो जारी कर अफवाहों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “उस वीडियो में लड़की का चेहरा, आवाज, बोलने का तरीका—सब अलग है। मैं इतनी फ्लुएंट इंग्लिश तक नहीं बोलती।” उनकी यह अपील 16 मिलियन से ज्यादा व्यूज पाकर वायरल हो गई, लेकिन ट्रोलिंग का दबाव लगातार बढ़ता गया। जन्नत ने कहा कि फॉलोअर्स बढ़ गए हैं, लेकिन मानसिक तनाव ने उन्हें तोड़ दिया है।
साइबर एक्सपर्ट्स की जांच—‘यह पूरी तरह डीपफेक’
साइबर विशेषज्ञों ने चेहरे और आवाज की फॉरेंसिक जांच कर स्पष्ट कर दिया कि यह वीडियो एआई से जनरेट किया गया है। फेशियल मैपिंग में पाया गया कि एक्सप्रेशन नैचुरल मूवमेंट से मैच नहीं कर रहे। आवाज को भी सिंथेटिक बताया गया। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर “पार्ट-2 आने वाला है” जैसी नई अफवाहें भी उछाल दी गईं, हालांकि किसी भी एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
2025 में 300–400% बढ़े डीपफेक मामले
साइबर सेल का कहना है कि इस साल डीपफेक से जुड़े मामलों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा निशाना महिलाएँ बन रही हैं। कई फर्जी टेलीग्राम चैनल और फेक लिंक मालवेयर फैलाने के लिए ऐसे वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। बताया गया कि लगभग 40% वायरल MMS केस असल में मैनिपुलेटेड होते हैं।
अन्य इन्फ्लुएंसर्स भी रहे निशाने पर
स्वीट जन्नत अकेली नहीं। इसी महीने सोफिक एसके, काजल कुमारी और धुनु जूनी को भी ऐसी ही अफवाहों का सामना करना पड़ा। कई मामलों में क्लिप बाद में पूरी तरह नकली साबित हुए।
ऑनलाइन सेफ्टी की चेतावनी—कानून और जागरूकता दोनों जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को डीपफेक रोकने के लिए मजबूत कानून, तेज टेकडाउन सिस्टम और बड़े स्तर पर डिजिटल लिटरेसी कैंपेन की सख्त जरूरत है। पीड़ितों के लिए काउंसलिंग और कानूनी सहायता की भी मांग बढ़ रही है। जन्नत के मामले ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट पर वायरल कंटेंट केवल मनोरंजन नहीं—किसी की जिंदगी भी बर्बाद कर सकता है। इंटरनेट की दुनिया में अफवाह एक क्लिक में फैल जाती है, लेकिन उसका असर महीनों या सालों तक पीछा करता है।

