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मिथिलांचल में चुनावी संग्राम: महिलाओं के भरोसे सत्ता की चाबी?

Bihar News: बिहार चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, मिथिलांचल का माहौल बिल्कुल बदल चुका है। यहां मुद्दा सिर्फ विकास या जातीय समीकरण नहीं है- इस बार भावनाएं और महिला मतदाता दोनों असली गेम-चेंजर बनकर उभरे हैं। एनडीए ने साफ-साफ रणनीति बनाई है- महिला सशक्तिकरण

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Bihar News: बिहार चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, मिथिलांचल का माहौल बिल्कुल बदल चुका है। यहां मुद्दा सिर्फ विकास या जातीय समीकरण नहीं है- इस बार भावनाएं और महिला मतदाता दोनों असली गेम-चेंजर बनकर उभरे हैं। एनडीए ने साफ-साफ रणनीति बनाई है- महिला सशक्तिकरण + सीता जन्मभूमि का सम्मान, और इसी के भरोसे पूरा मैदान जीता जाना है।

सीता जी का मंदिर- भावनाओं की राजनीति

पुनौराधाम में माता सीता के भव्य मंदिर का शिलान्यास पहले ही हो चुका है। बीजेपी और जेडीयू दोनों मानती हैं कि यह सिर्फ धार्मिक परियोजना नहीं, बल्कि मिथिला के सम्मान का सवाल है। लोग भी इसे दिल से जोड़कर देख रहे हैं। मिथिला की गृहणी शारदा देवी मुस्कुराते हुए कहती हैं, “अब बारी हमारी है… अपनी बेटी सीता का मंदिर बनवाना ही होगा।”

विपक्ष का सॉफ्ट-हिंदुत्व प्लान

इधर कांग्रेस-राजद खेमे ने भी मंदिर और आस्था पर अपना दांव खेला है। राहुल और प्रियंका गांधी ने मंदिर जाकर बीजेपी पर निशाना साधा- “राम को मानते हैं, सीता को क्यों भूल जाते हैं?” यानी दोनों तरफ से भावनाओं का मुकाबला जमकर है।

क्यों इतना अहम है मिथिला?

2020 में यहां की 60 में से 40 सीटें एनडीए की झोली में गई थीं। इस बार लक्ष्य इससे भी बड़ा है- और मंदिर इसका केंद्र बना है।
जनता भी विकास और सम्मान की उम्मीदों के साथ देख रही है कि इस बार किस हाथ में बागडोर जाएगी।

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