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World News: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इजरायली संसद द्वारा वेस्ट बैंक पर कब्जे से संबंधित दो विधेयकों को पारित करने के बाद मुस्लिम देशों का गुस्सा भड़क गया है। जॉर्डन, तुर्की, कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया और अन्य देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इजरायल को चेताया है कि यदि उसने यह कदम नहीं रोका तो परिणाम गंभीर होंगे।
विधेयक से बढ़ा विवाद
इजरायली संसद ने दो विधेयक पारित किए हैं — एक वेस्ट बैंक पर इजरायली संप्रभुता लागू करने से संबंधित है और दूसरा पूर्वी जेरूसलम के पास माले अदुमिम बस्ती को कवर करता है। विपक्षी सांसदों ने इसे बहुमत से पास करा लिया, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ने इसका विरोध किया था। यह कदम 1967 से फिलिस्तीनी क्षेत्र पर चले आ रहे कब्जे को कानूनी वैधता देने जैसा माना जा रहा है।
मुस्लिम देशों का संयुक्त रुख
अरब लीग, इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) और 15 से अधिक मुस्लिम देशों ने बयान जारी कर कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। बस्तियों को “अवैध उपनिवेश” बताया गया और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा गया कि फिलिस्तीनियों को आत्मनिर्णय का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
तुर्की ने इन विधेयकों को “शून्य और गैरकानूनी” कहा, वहीं कतर ने सबसे कड़े शब्दों में इजरायल की निंदा की। यूएई ने इसे “रेड लाइन” बताते हुए चेताया कि वेस्ट बैंक का विलय क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए विनाशकारी परिणाम लाएगा।
पाकिस्तान ने भी बदला रुख
पाकिस्तान ने भी इजरायल के इस कदम की कठोर निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये विधेयक अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन हैं। पाकिस्तान ने दोहराया कि वह पूर्वी जेरूसलम को राजधानी बनाकर 1967 की सीमाओं में स्थापित स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन करता है।
क्षेत्रीय शांति पर खतरा
मुस्लिम देशों ने चेताया कि इजरायल की एकतरफा नीति से मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक शांति खतरे में पड़ सकती है। ओआईसी ने स्पष्ट कहा कि गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी जेरूसलम एक भौगोलिक इकाई हैं और इजरायल का कोई कानूनी दावा नहीं बनता।

