Lifestyle Adda: आधुनिक दौर में कामकाजी महिलाओं के लिए करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऑफिस के काम के साथ बच्चों की दैनिक जरूरतों और परवरिश का ख्याल रखना आसान नहीं होता। कई बार समय के अभाव में बच्चे पर पूरा ध्यान न दे पाने के कारण मां के मन में अपराधबोध (गिल्ट) की भावना आने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही प्लानिंग, प्राथमिकताओं के निर्धारण और कुछ व्यावहारिक बदलावों से करियर और पैरेंटिंग दोनों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
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अपनी प्राथमिकताएं तय करें
एक मां के लिए सबसे पहली प्राथमिकता उसका बच्चा ही होता है। ऐसे में सबसे पहले यह तय करें कि ऑफिस के बाद का समय आप बच्चे को किस तरह और कितना दे सकती हैं। बच्चे की प्राथमिक जरूरतों को समझें और यह निर्धारित करें कि किन गैर-जरूरी चीजों या कामों से समझौता किया जा सकता है, ताकि बच्चे के लिए पर्याप्त समय निकल सके।
रूटीन और प्लानिंग के साथ काम करें
कामकाजी मांओं के लिए हर काम की योजना पहले से तैयार करना जरूरी है। दैनिक कार्यों का एक निश्चित रूटीन बनाएं कि किस समय कौन-सा काम निपटाना है। इससे समय की बचत होगी और बचा हुआ समय बच्चे के साथ बिताया जा सकेगा। इसके अलावा, जब आप ऑफिस के बाद बच्चे के साथ हों, तो मोबाइल और स्क्रीन को खुद से दूर रखें ताकि बच्चे को क्वालिटी टाइम मिल सके।
पार्टनर का सहयोग और वर्क फ्रॉम होम का विकल्प
अगर बच्चा छोटा है, तो सभी घरेलू कामों की जिम्मेदारी अकेले उठाने के बजाय अपने पार्टनर और परिवार के अन्य सदस्यों की मदद लें। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स या वर्क फ्रॉम होम (WFH) का विकल्प अपनाएं, ताकि काम के घंटे नियंत्रित रहें और बच्चे को अकेलापन महसूस न हो।
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वीकेंड और शाम का समय बच्चे को समर्पित करें
दिनभर काम के सिलसिले में बाहर रहने के बाद जब शाम को घर लौटें, तो पूरा समय बच्चे को दें। इससे मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव और नजदीकियां बनी रहती हैं। इसके साथ ही, पूरे हफ्ते के जरूरी काम पहले ही निपटा लें ताकि वीकेंड पूरी तरह से खाली रहे और आप छुट्टी का पूरा दिन बच्चे के साथ खेल-कूद व बातचीत में बिता सकें।




