PATNA: कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली बिहार की महिलाओं ने जब से पंचायती राज व्यवस्था में आगे आकर कमान संभाली है, तब से ग्रामीण इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल रही है। ये महिला जनप्रतिनिधि न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही हैं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों पर कड़े फैसले लेकर बेटियों और समाज के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, पंचायती राज विभाग और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (C3) की साझा पहल से ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है।
अधिकारियों से तालमेल बैठाकर हर घर पहुंचाया नल का जल
दरभंगा जिले के कुशेश्वर स्थान पूर्वी प्रखंड स्थित सुगरैन पंचायत (वार्ड नंबर 16) की रहने वाली हीरा देवी पहले एक साधारण गृहिणी थीं और उनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। गांव में रुके हुए विकास कार्यों को देखकर उन्होंने खुद चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया और शानदार जीत दर्ज की। वार्ड सदस्य बनते ही उन्होंने सबसे पहले नल-जल योजना की स्थिति सुधारी। उन्होंने ब्लॉक से लेकर डिस्ट्रिक्ट लेवल तक के अफसरों से लगातार संपर्क साधा और बांध पार के टोले के लिए नई जलापूर्ति योजना को मंजूरी दिलवाई। नतीजा यह है कि आज उनके वार्ड के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल आसानी से पहुंच रहा है।
बेटियों की सुरक्षा के लिए स्कूल में बनवाई ऊंची चहारदीवारी
पूर्वी चंपारण जिले के मेहसी प्रखंड की महमदपुर मझौलिया पंचायत की मुखिया अंजलि शरण ने जब स्थानीय स्कूल का दौरा किया, तो देखा कि किशोरियों की उपस्थिति लगातार घट रही है। छात्राओं ने बताया कि स्कूल की बाउंड्री वॉल काफी नीची होने की वजह से शाम होते ही असामाजिक तत्व अंदर घुस आते हैं, जिससे डर बना रहता है। इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के पंचायत फंड से स्कूल की ऊंची व मजबूत बाउंड्री और लोहे का गेट तैयार कराया। अब सुरक्षित माहौल मिलने से छात्राएं नियमित रूप से स्कूल आ रही हैं और परिजनों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
जर्जर आंगनवाड़ी को संवारकर बनाया मॉडल लर्निंग सेंटर
इसी जिले की सिसवा पूर्वी पंचायत की मुखिया तानिया परवीन ने बदहाल पड़े आंगनवाड़ी केंद्र का कायाकल्प कर दिया। उन्होंने पंचायत विकास फंड और सरकारी योजनाओं के समन्वय से भवन की मरम्मत कराई, दीवारों पर सुंदर पेंटिंग बनवाई, आरओ (RO) वाटर प्यूरीफायर, बच्चों के अनुकूल टॉयलेट, बिजली, बैठने के लिए बेंच-कुर्सी और खेल-कूद की सामग्री उपलब्ध कराई। इस प्रयास से यह केंद्र अब एक मॉडल लर्निंग सेंटर बन चुका है, जिससे बच्चों के दाखिले और अटेंडेंस में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।





