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क्या आप जानते हैं रक्षा बंधन की शुरुआत महाभारत से जुड़ी है? जानें 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त!

Public Adda News: भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा है एक भावनात्मक

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Public Adda News: भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा है एक भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व, जो सदियों से भारतीय संस्कृति में जुड़ा रहा है।

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है?

रक्षा बंधन का अर्थ है ‘रक्षा का बंधन’। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है और जीवन भर उसके साथ खड़ा रहने का संकल्प लेता है।

यह पर्व न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी एकता और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

कहां से हुई थी रक्षा बंधन की शुरुआत?

रक्षा बंधन का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। जब भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी उंगली में चोट लग गई थी। उस समय द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इस प्रेम और समर्पण को देखकर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से वादा किया कि वे जीवन भर उसकी रक्षा करेंगे। यही घटना आज रक्षा बंधन के पीछे की भावना को दर्शाती है।

इतिहास में एक और किस्सा प्रसिद्ध है—जब रानी कर्णावती ने मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजी थी, तो हुमायूं ने उसकी रक्षा के लिए युद्ध में सहायता की थी।

2025 में कब है रक्षा बंधन?

वर्ष 2025 में रक्षा बंधन शनिवार, 9 अगस्त को मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है क्योंकि इस दिन पूर्णिमा तिथि पूरे दिन उपलब्ध रहेगी और रक्षाबंधन की सभी रस्में समय पर संपन्न की जा सकेंगी।

रक्षा बंधन 2025 का शुभ मुहूर्त:

राखी बांधने का उत्तम मुहूर्त सुबह 5:35 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा। यह समय पंचांग के अनुसार सबसे श्रेष्ठ माना गया है, जब बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने के लिए भद्र काल से बचना बेहद जरूरी होता है क्योंकि इस समय कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है। 2025 में भद्रा काल सुबह से पहले ही समाप्त हो जाएगा, जिससे पूरा दिन रक्षा बंधन के लिए अनुकूल रहेगा।

क्या है इस दिन का भावनात्मक पहलू?

रक्षा बंधन केवल परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को सहेजने और मन से जोड़ने का पर्व है। इस दिन जब बहनें दूर शहरों से भी आकर अपने भाइयों के साथ समय बिताती हैं, तो यह केवल राखी नहीं, बल्कि बचपन की ढेरों यादें और भावनाएं भी बांध देती हैं।

आज के समय में जब लोग व्यस्त जीवन में रिश्तों से दूर होते जा रहे हैं, रक्षा बंधन का पर्व उन्हें फिर से जोड़ने का माध्यम बनता है। यह दिन भाई-बहन के बीच भरोसे, सुरक्षा और प्रेम को दोहराने का अवसर है।

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