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प्रेमी युगल की रहस्यमयी खुदकुशी से सनसनी! 2 दिन पुराने शव मिले पेड़ से लटके

Jharkhand News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बुधवार सुबह पोकलाबेड़ा गांव के पास जंगल में एक नीम के पेड़ से प्रेमी युगल के शव लटकते मिले, जिससे इलाके में सनसनी फैल

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Jharkhand News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बुधवार सुबह पोकलाबेड़ा गांव के पास जंगल में एक नीम के पेड़ से प्रेमी युगल के शव लटकते मिले, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि दोनों ने आत्महत्या की है और शवों की हालत देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत दो दिन पहले ही हो चुकी थी।

कौन थे ये प्रेमी युगल?

मृतकों की पहचान पोकलाबेड़ा गांव निवासी देवेंद्र नाथ सिंह के पुत्र जामिनी सिंह (25 वर्ष) और गाड़ीग्राम निवासी एक महिला के रूप में हुई है। महिला पहले से विवाहित थी और करीब तीन महीने पहले अपनी तीन साल की बच्ची को छोड़कर घर से भाग गई थी। तब से वह जामिनी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। दोनों जमशेदपुर में दिहाड़ी मजदूरी कर गुजर-बसर कर रहे थे।

बीते कल की कहानी, सामाजिक ताने और तनाव!

स्थानीय लोगों के अनुसार युवक जामिनी सिंह पहले एक छेड़खानी के मामले में जेल जा चुका था और लगभग एक साल पहले ही बाहर आया था। जेल से छूटने के बाद ही उसकी मुलाकात महिला से हुई और दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया। हालांकि युवक के परिजनों ने इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया, जिससे दोनों मानसिक तनाव में थे।

परिजनों की नाराजगी, समाज का ताना और भविष्य की अनिश्चितता ने शायद इन दोनों को अंदर ही अंदर तोड़ दिया। पुलिस को शक है कि इन्हीं कारणों के चलते दोनों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया।

पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

घटना की सूचना मिलते ही पटमदा थाना प्रभारी करमपाल भगत दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर एमजीएम मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर मामला दर्ज कर लिया है और हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है।

ग्रामीणों में चर्चा, उठ रहे कई सवाल

इस घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। समाज, परिवार और रिश्तों के बीच पिसते प्रेमी युगल की यह दुखद दास्तां एक बार फिर सोचने को मजबूर करती है कि क्या आज भी प्रेम को समाज की मंजूरी जरूरी है?

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