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यूएसएस अब्राहम लिंकन ईरान रवाना, जानिए इसकी सैन्य क्षमता और भूमिका

World News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने अपना सबसे ताकतवर युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है। यह निमित्ज़-क्लास सुपरकैरियर पहले दक्षिण चीन सागर में तैनात था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए

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World News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने अपना सबसे ताकतवर युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है। यह निमित्ज़-क्लास सुपरकैरियर पहले दक्षिण चीन सागर में तैनात था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए पेंटागन ने इसके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ईरान के करीब भेजने का फैसला किया है।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि चलता-फिरता एयरबेस और कमांड सेंटर है। यूएसएस अब्राहम लिंकन, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 का फ्लैगशिप है। इसके साथ 3 से 4 अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन और सप्लाई व फ्यूल सपोर्ट जहाज तैनात रहते हैं। जरूरत पड़ने पर यह समूह महीनों तक समुद्र में रहकर ऑपरेशन चला सकता है।

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करीब एक लाख टन वजनी यह सुपरकैरियर न्यूक्लियर-पावर्ड है, यानी इसे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती। अकेले इस जहाज पर करीब 5,000 से 6,000 नौसैनिक और एयरक्रू तैनात रहते हैं, जबकि पूरे स्ट्राइक ग्रुप में यह संख्या 7,000 से 8,000 तक पहुंच जाती है।

इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका एयर विंग है। कैरियर पर करीब 65 से 70 लड़ाकू और सपोर्ट विमान तैनात रहते हैं, जो दिन-रात हमला, निगरानी और रक्षा जैसे मिशन अंजाम दे सकते हैं। यही वजह है कि इसे समुद्र में बना एक पूरा एयरबेस माना जाता है।

इसके अलावा इस ग्रुप के पास सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें हैं, जिन्हें डिस्ट्रॉयर और सबमरीन से दागा जा सकता है। सैन्य आकलन के अनुसार, पूरा स्ट्राइक ग्रुप एक साथ सैकड़ों मिसाइलें लॉन्च करने में सक्षम है, जिससे किसी भी दुश्मन के एयरबेस, मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक अड्डों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ईरान के साथ सीधा टकराव होता है, तो यह ग्रुप निर्णायक भूमिका निभा सकता है। हालांकि ईरान के पास भी बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और प्रॉक्सी मिलिशिया हैं, जो संघर्ष को लंबा और जटिल बना सकते हैं। फिलहाल अमेरिका का संदेश साफ है—यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती युद्ध से ज्यादा रोकथाम और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए है।

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