Washington, USA: विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद हर युवा का सबसे बड़ा सपना होता है कि उसे एक बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने करियर की शुरुआत करने का मौका मिले। अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग यानी OPT वर्क परमिट ठीक यही भूमिका निभा रहा है। यह सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज या वर्क परमिट नहीं, बल्कि अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक वैश्विक कार्य संस्कृति से जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु साबित हो रहा है।
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अमेरिका में भारतीय छात्रों के लिए OPT क्यों है खास?
अमेरिका में हर साल हजारों भारतीय छात्र विभिन्न संकायों से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करते हैं। OPT के तहत इन छात्रों को अपनी डिग्री से जुड़े क्षेत्र में कम से कम एक साल तक काम करने की कानूनी अनुमति मिलती है, जिससे उनके भविष्य की नींव मजबूत होती है।
STEM छात्रों को तीन साल का बड़ा अवसर
साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह सुविधा और भी ज्यादा फायदेमंद है। सामान्य एक साल के अलावा इन छात्रों को 24 महीने (दो साल) का अतिरिक्त विस्तार मिलता है।
यानी STEM बैकग्राउंड के युवा कुल तीन साल तक अमेरिका में रहकर प्रत्यक्ष कार्य अनुभव हासिल कर सकते हैं। यह अतिरिक्त समय उन्हें अमेरिकी कंपनियों की कार्यशैली को गहराई से समझने और अपनी तकनीकी दक्षता को निखारने का पूरा अवसर देता है।
लचीलापन और मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्किंग
OPT की एक बड़ी खासियत यह है कि यह छात्रों को पूरे अमेरिका में कहीं भी काम करने की आजादी देता है। चाहे सिलिकॉन वैली के दिग्गज टेक हब्स हों, बोस्टन का प्रसिद्ध बायो-टेक कॉरिडोर या फिर नए उभरते स्टार्टअप्स, छात्र अपनी पसंद के अनुसार अवसर तलाश सकते हैं।
इस दौरान बनने वाले व्यावसायिक संपर्क छात्रों के पूरे करियर में काम आते हैं, चाहे वे आगे चलकर अमेरिका में बसने का फैसला करें या वापस भारत लौटकर काम शुरू करें। इसके साथ ही, बहुराष्ट्रीय टीमों में काम करने से छात्रों का व्यक्तित्व और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी काफी परिपक्व होता है।
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योग्यता और प्रक्रिया से जुड़ी भ्रांतियां दूर होना जरूरी
अक्सर यह गलत धारणा देखने को मिलती है कि OPT सिर्फ बेहद असाधारण या विशिष्ट योग्यता वाले छात्रों के लिए है और इसे पाना बहुत मुश्किल है। हकीकत यह है कि जो भी छात्र अपनी यूनिवर्सिटी और अमेरिकी आव्रजन नियमों की बुनियादी शर्तें पूरी करते हैं, वे इसके पात्र होते हैं।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस इस पूरी प्रक्रिया में छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं। वहीं अमेरिकी कंपनियां भी इसके जरिए वैश्विक प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें अपनी स्थायी टीम का हिस्सा बनाने को प्राथमिकता देती हैं।




