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Washington, (USA): अमेरिकी सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने बाइडन प्रशासन के लिए एक बेहद गंभीर और कूटनीतिक चेतावनी जारी की है। सीनेटर के अनुसार, जे-1 (J-1) वीजा छूट (वेवर) की आधिकारिक प्रक्रिया में हो रही अत्यधिक प्रशासनिक देरी के कारण विदेशों में प्रशिक्षित सैकड़ों योग्य डॉक्टरों को मजबूरी में अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। इस सरकारी सुस्ती की वजह से देश के ग्रामीण और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित (अंडरसर्व्ड) इलाकों में डॉक्टरों की कमी का संकट अब और ज्यादा भयानक रूप ले सकता है। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट प्रतिनिधि गिलिब्रैंड ने अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री को एक कड़ा पत्र लिखकर इस चिंताजनक स्थिति पर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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ऑफिस ऑफ ग्लोबल अफेयर्स की सुस्ती बनी बड़ी वजह
सीनेटर गिलिब्रैंड के मुताबिक, अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के ‘ऑफिस ऑफ ग्लोबल अफेयर्स’ में प्रशासनिक फाइलें और आवेदन महीनों से लंबित (पेंडिंग) पड़े हैं। इसी सुस्ती के कारण योग्य विदेशी डॉक्टर देशभर के अस्पतालों में अपनी सेवाएं समय पर शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इस समस्या का सबसे सीधा और घातक असर न्यूयॉर्क के कई ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
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भारतीयों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संकट? यह पूरा मुद्दा भारतीय डॉक्टरों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में प्रैक्टिस कर रहे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल ग्रेजुएट्स (IMGs) में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय डॉक्टरों की ही है।
न्यूयॉर्क के ग्रामीण इलाकों में बदतर हुए हालात
न्यूयॉर्क राज्य अपनी चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टरों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। राज्य के कुल कार्यरत डॉक्टरों में से एक-तिहाई (33% से अधिक) संख्या विदेशी डॉक्टरों की है। साल 2025 की एक आधिकारिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि न्यूयॉर्क के 16 ग्रामीण काउंटियों में डॉक्टरों की पहले से ही भारी किल्लत है। कई काउंटियों में तो बच्चों के डॉक्टर (बाल रोग विशेषज्ञ) या महिला डॉक्टर (स्त्री रोग विशेषज्ञ) तक उपलब्ध नहीं हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन हर 10,000 की आबादी पर केवल 4 प्राथमिक स्वास्थ्य चिकित्सक (PCPs) हैं, जो राज्य के सामान्य औसत से आधे से भी कम है।
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क्या है जे-1 वीजा वेवर कार्यक्रम और 30 जुलाई की डेडलाइन?
इन विपरीत और कठिन परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल मुख्य रूप से ‘जे-1 वीजा वेवर कार्यक्रम’ (J-1 Visa Waiver Program) के भरोसे ही चलते हैं। यह विशेष कार्यक्रम विदेशी डॉक्टरों को अमेरिका में अपनी मेडिकल पढ़ाई या रेजिडेंसी पूरी करने के बाद भी वहीं रहने और काम करने की कानूनी अनुमति देता है। इसके बदले डॉक्टरों को यह शर्त माननी होती है कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले ग्रामीण या पिछड़े क्षेत्रों में कम से कम 3 साल तक अपनी सेवाएं देंगे।
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लेकिन वर्तमान में इस वेवर की आवेदन प्रक्रिया में कई महीनों का समय लग रहा है। स्थिति इसलिए भी बेहद नाजुक हो गई है क्योंकि अपनी मेडिकल रेजिडेंसी पूरी कर रहे कई डॉक्टरों के लिए 30 जुलाई 2026 की आखिरी समयसीमा (डेडलाइन) बिल्कुल करीब है। यदि इस तय तारीख तक उनके वेवर आवेदन को अमेरिकी सरकार से मंजूरी नहीं मिलती है, तो उन्हें कानूनी रूप से तत्काल अपने मूल देश (जैसे भारत) वापस लौटना होगा। इस संभावित स्वास्थ्य संकट को समय रहते टालने के लिए सीनेटर गिलिब्रैंड ने विभाग से 15 जून 2026 तक सभी लंबित आवेदनों की स्पष्ट संख्या और उन्हें निपटाने का एक ठोस टाइमफ्रेम मांगा है।

