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ट्रंप की हुंकार, ईरान का पलटवार: इजराइल की सेना ने थामी जंग की कमान!

World News: दुनिया की नजरें एक बार फिर मध्य-पूर्व के आसमान पर टिकी हैं, जहां तनाव की तपिश अब ज्वालामुखी बनने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के आंतरिक हालातों पर जिस तरह से सैन्य हस्तक्षेप का संकेत दिया है, उसने

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World News: दुनिया की नजरें एक बार फिर मध्य-पूर्व के आसमान पर टिकी हैं, जहां तनाव की तपिश अब ज्वालामुखी बनने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के आंतरिक हालातों पर जिस तरह से सैन्य हस्तक्षेप का संकेत दिया है, उसने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। उधर, इजराइल ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल मूकदर्शक नहीं रहेगा; उसकी सेना ने सीमा पर हलचल बढ़ा दी है और जंग का काउंटडाउन जैसे शुरू हो चुका है।

ईरान में कोहराम और ट्रंप की सैन्य रणनीति

ईरान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। मानवाधिकार समूहों की मानें तो हिंसा में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसी अराजकता के बीच वाइट हाउस से आए ट्रंप के बयानों ने आग में घी का काम किया है। ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम अब न केवल आर्थिक प्रतिबंधों, बल्कि ‘साइबर अटैक’ और सीधे ‘सैन्य एक्शन’ जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है। ट्रंप का दावा है कि उनकी इस धमकी के बाद अब ईरान सरकार घुटनों पर है और बातचीत का रास्ता ढूंढ रही है।

तेहरान का करारा जवाब: ‘यह हस्तक्षेप नहीं सहेंगे’

इधर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिका की धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने विदेशी राजनयिकों के सामने दावा किया कि सड़कों पर हो रही हिंसा दरअसल अमेरिकी दखल का बहाना बनाने के लिए रची गई है। हालांकि, ईरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारी ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजराइल मुर्दाबाद’ के नारों के साथ अपनी संप्रभुता की रक्षा का दम भर रहे हैं।

इजराइल की ‘जंग’ वाली तैयारी और नेतन्याहू की बैठक

सबसे ज्यादा हलचल इजराइल में देखी जा रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा अधिकारियों और कैबिनेट मंत्रियों के साथ बंद कमरे में एक हाई-प्रोफाइल बैठक की है। इजरायली सेना (IDF) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि ईरान के हालात भले ही उनका अंदरूनी मामला हो, लेकिन इजराइल अपनी रक्षा के लिए हर मोर्चे पर तैयार है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अपनी धमकियों को जल्द ही धरातल पर उतार सकते हैं, और ऐसी स्थिति में इजराइल ‘फ्रंटलाइन’ पर होगा।

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फिलहाल, मध्य-पूर्व की हवाओं में बारूद की गंध साफ महसूस की जा सकती है। क्या यह कूटनीतिक दबाव की एक चाल है या फिर दुनिया एक और बड़े विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रही है? इसका जवाब आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।

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