Bokaro news:- झारखण्ड आन्दोलन के प्रमुख सह मजदूरों की मसिहा, सह पुर्व विधायक व सांसद कॉमरेड ए.के.राय की 91 जन्म जयंती के अवसर पर सोमवार को चन्दनकियारी विधानसभा के पत्थरकाटा साईट में जन्म जयंती समारोह आयोजित कर उसके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी. अध्यक्षता झारखण्ड जन मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष भरत लाल ठाकुर ने किया.जबकी संचालन बासुदेव गोप ने किया.
वहीं मुख्य अतिथि के रुप में शामिल किसान नेता सह चन्दनकियारी विधानसभा क्षेत्र के पुर्व प्रत्याशी जगन्नाथ रजवार ने कहा कि कॉमरेड ए.के. राय की जन्म 15 जून 1935 और मृत्यु 21 जुलाई 2019 हुई. उसी बीच वे एक प्रख्यात मार्क्सवादी चिंतक, ट्रेड यूनियन नेता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख स्तंभ बने थे. वे सिंदरी में इंजीनियर की नौकरी छोड़ मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने वाले राय को उनकी सादगी और विचारधारा के कारण ‘राजनीतिक संत’ माना जाता था. उनका जन्म 15 जून 1935, राजशाही जिला, पूर्वी बंगाल और निधन 21 जुलाई 2019, धनबाद में हुई. झारखण्ड आन्दोलन, मजदूर आंदोलन, झारखंड मुक्ति मोर्चा के सह-संस्थापक, मार्क्सवादी समन्वय समिति के संस्थापक प्रारंभिक जीवन और नौकरी ए.के. राय ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी.
पढ़ाई के बाद उन्हें सिंदरी के उर्वरक कारखाने में इंजीनियर की नौकरी मिल गई. लेकिन उनका मन मजदूरों के दयनीय हालातों को देखकर विचलित हो उठा. वर्ष 1966 में कोयला खदानों में मजदूरों के शोषण के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. इसके बाद वे पूर्णकालिक रूप से श्रमिक अधिकारों के लिए समर्पित हो गए. राजनीतिक एवं सामाजिक सफर झारखंड आंदोलन और झामुमो का गठन में ए.के. राय ने शिबू सोरेन और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया. 1973 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
झामुमो से अलग होने के बाद, उन्होंने मार्क्सवादी समन्वय समिति बनाई.संसदीय राजनीति में ए.के. राय बिहार विधानसभा के लिए. 1967 वे पहली बार सिन्द्री विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने के साथ साथ वे तीन बार विधायक चुने गए. इसके बाद वे धनबाद लोकसभा क्षेत्र से 1977, 1980 और 1989 में कुल तीन बार सांसद चुने गए. आपातकाल के दौरान वे पूरी अवधि तक जेल में बंद रहे और जेल में रहकर ही 1977 का चुनाव जीता था. उनका प्रसिद्ध नारा था “मेरी राय, आपकी राय, सबकी राय, ए.के. राय.सादगी और विरासत ए.के. राय भारतीय राजनीति में शुचिता, ईमानदारी और सादगी की जीती-जागती मिसाल थे.
आधुनिक राजनीति में जहाँ अधिकांश राजनेता करोड़पति हैं, वहीं उनके पास कोई अपना घर, गाड़ी या बैंक बैलेंस नहीं था. वे बिना बिजली वाले पार्टी कार्यालय में बेहद सादा जीवन व्यतीत करते थे. आजीवन अविवाहित रहे कॉमरेड राय ने अपना पूरा जीवन वंचितों, आदिवासियों और कोयला मजदूरों के नाम कर दिया. उनके दिखाए मार्ग पर चलकर उन्माद व उत्पात की राजनीति के खिलाफ जन संघर्षों के तेज करना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. मौके पर अंकित कुम्भकार,अशोक गोप, सुभाष बाउरी, आनन्द कुम्भकार, संजीव कुमार कर्ण, दिपक प्रमाणिक आदि शामिल रहे।
