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कोल्हान में शहीदों को श्रद्धांजलि, आदिवासी समाज ने लिया संकल्प

Saraikela-Kharsawan News: आज दिनांक 1 जनवरी 2026 को आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया एवं सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई के संयुक्त तत्वाधान में कोल्हान क्षेत्र के खरसावां, सेरेंगसिया, जगन्नाथपुर और राजाबासा में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस

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Saraikela-Kharsawan News: आज दिनांक 1 जनवरी 2026 को आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया एवं सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई के संयुक्त तत्वाधान में कोल्हान क्षेत्र के खरसावां, सेरेंगसिया, जगन्नाथपुर और राजाबासा में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।

मानसिंह तिरिया ने कहा कि कोल विद्रोह में शहीद हुए वीरों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी और 2 जनवरी आदिवासी इतिहास के लिए शोक का दिन है। इन दिनों में आदिवासियों की हत्या की गई, जिसे इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने शहीद दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाने की अपील की।

उन्होंने आगे कहा कि कोल विद्रोह के जननायक वीर पोटो हो’ को फांसी दिए जाने के कई वर्षों बाद उनके नाम से राजाबासा गांव की पहचान बनी, लेकिन आज उस गांव की स्थिति बद से बदतर है। वहां के लोग रोजी-रोटी के लिए जैंतगढ़, चंपुआ और अन्य स्थानों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से इस गांव की स्थिति पर ध्यान देने और इसे गोद लेने की मांग की।

मानसिंह तिरिया ने बताया कि आज ही के दिन गवर्नर जनरल के पॉलिटिकल एजेंट कैप्टन थॉमस विल्किंसन ने हो’ दिसुम (वर्तमान कोल्हान) के महान लड़ाकू पोटो हो’, नारा हो’, बड़ाय हो’, पांडुवा हो’ और बोड़ेया हो’ को फांसी एवं कारावास की सजा सुनाई थी। 1820-21 से लेकर 1837 तक अंग्रेजों और हो’ आदिवासियों के बीच लगातार संघर्ष चलता रहा। 1 जनवरी 1838 को पोटो हो’, नारा हो’ और बड़ाय हो’ को जगन्नाथपुर बाजार में तथा 2 जनवरी 1838 को बोड़ेया हो’ और पांडुवा हो’ को सेरेंगसिया गांव में फांसी दी गई थी।
इस मौके पर सुनील गगाराई ने कहा कि 1-2 जनवरी को फांसी देना अंग्रेजों की सोची-समझी साजिश थी, ताकि आदिवासी अपने इतिहास को भूल जाएं। उन्होंने 1 जनवरी 1948 को खरसावां हाट मैदान में हुई गोलीबारी की घटना का भी जिक्र किया, जब ओडिशा में विलय के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों पर पुलिस ने गोली चलाई थी।

कार्यक्रम में चुमरू पिंगुवा, सजान देवगम, सुनील लागुरी, मदन सिंकु, नरसिंह पुर्ती, माटा करोवा, अर्जुन मुंडा, जोसेफ मुंडा, लुकुना पूर्ति, दामू बोबोंगा, सादु मुंडा, पुष्पा मुंडा, शांति पूर्ति, सरस्वती सवैया, हीरा मुनी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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