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रिंग रोड पर टोल टैक्स का जाल, कम दूरी में बने टोल प्लाजा से आम जनता हलकान

रिंग रोड पर सफर पड़ा भारी, नियम-विरुद्ध टोल वसूली, लोकल पास की किल्लत और दुर्घटनाओं से कराह रहे राहगीर

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और भारी वाहनों को शहर के बाहर-बाहर निकालने के उद्देश्य से करीब 85 किलोमीटर लंबे ‘रांची रिंग रोड’ का निर्माण कराया गया था। लेकिन आज यही रिंग रोड आम वाहन चालकों, दैनिक यात्रियों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए भारी परेशानी और आर्थिक बोझ का कारण बन चुका है। रिंग रोड और इससे जुड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित टोल प्लाजा पर आए दिन होने वाली नोकझोंक, लंबी कतारें और नियम-विरुद्ध टोल वसूली अब एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

रिंग रोड और आसपास के प्रमुख टोल प्लाजा

रांची रिंग रोड और उससे सटे कनेक्टिंग हाईवे स्ट्रेच पर मुख्य रूप से निम्नलिखित टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं:
  1. हेसल टोल प्लाजा (नामकुम/सिलवे क्षेत्र): यह रिंग रोड का एक प्रमुख टोल प्लाजा है, जहां से गुजरने वाले हजारों वाहनों से प्रतिदिन टोल वसूला जाता है।
  2. तुरुप टोल प्लाजा (अनगड़ा क्षेत्र): रिंग रोड के पूर्वी हिस्से में स्थित यह टोल प्लाजा लंबे समय से विवादों में घिरा हुआ है।
  3. मांडर टोल प्लाजा (एनएच-75/रिंग रोड कनेक्टिंग स्ट्रेच): रांची-लोहरदगा-लातेहार मार्ग को जोड़ने वाले इस टोल प्लाजा पर स्थानीय वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों की भारी आवाजाही रहती है।
  4. चुटुपालू एवं बुंडू टोल प्लाजा (एनएच-33 कनेक्टिंग क्षेत्र): रिंग रोड से महज 20 से 30 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थित होने के कारण ये टोल प्लाजा दूरी के नियमों का उल्लंघन करते नजर आते हैं।

आम लोगों को हो रही 5 मुख्य परेशानियां

1. 60 किलोमीटर के नियम का सरेआम उल्लंघन

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी कम से कम 60 किलोमीटर होनी चाहिए। लेकिन रांची रिंग रोड और एनएच-33 के आसपास मात्र 20 से 30 किलोमीटर के दायरे में ही दो से तीन टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, अनगड़ा के पास तुरुप टोल प्लाजा और चुटुपालू टोल प्लाजा के बीच बेहद कम दूरी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस अवैध संचालन से आम जनता से जबरन वसूली की जा रही है।

2. स्थानीय निवासियों और किसानों पर आर्थिक बोझ

नियमों के मुताबिक टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए निःशुल्क या रियायती स्थानीय पास (Local Pass) की व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, धरातल पर स्थिति बेहद खराब है। स्थानीय ग्रामीणों को आधार कार्ड दिखाने के बावजूद रियायत नहीं दी जाती, जिससे रोजाना खेती-किसानी, दूध, सब्जी या नौकरी के सिलसिले में शहर आने-जाने वाले ग्रामीणों को हर दिन भारी टोल चुकाना पड़ता है।

3. अंडरपास और सर्विस रोड का न होना: जानलेवा साबित हो रही रफ्तार

रिंग रोड निर्माण के समय घनी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों (जैसे सिलवे पंचायत, हेसल आदि) में एनएचएआई (NHAI) द्वारा अंडरपास और ओवरब्रिज बनाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अंडरपास नहीं बने हैं। इसके चलते तेज रफ्तार ट्रकों और ट्रेलरों की चपेट में आकर आए दिन स्थानीय ग्रामीण और मवेशी अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं। सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से आक्रोशित ग्रामीण कई बार टोल प्लाजा को अनिश्चितकाल के लिए जाम करने की चेतावनी दे चुके हैं।

4. FASTag स्कैनिंग की विफलता और ट्रैफिक जाम

टोल प्लाजा पर स्थापित FASTag स्कैनर सिस्टम अक्सर तकनीकी खराबी का शिकार रहते हैं। इसके अलावा कैश लेन की सही व्यवस्था न होने से टोल बूथों पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं। 10 से 15 मिनट का समय केवल टोल पार करने में बर्बाद हो जाता है, जिससे एम्बुलेंस और जरूरी सेवाओं में लगे वाहनों को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

5. टोलकर्मियों का दुर्व्यवहार और हिंसक झड़पें

टोल प्लाजा पर आए दिन बाहुबलियों और टोल कर्मचारियों का अभद्र व्यवहार देखने को मिलता है। मामूली कहासुनी या स्थानीय पास की मांग करने पर मारपीट और गाली-गलौज की नौबत आ जाती है। मांडर और हेसल टोल प्लाजा पर पूर्व में भी हिंसक वारदातें और पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे वहां तनावपूर्ण माहौल बना रहता है।

जन-आंदोलन और प्रशासन की चुप्पी

रांची रिंग रोड के इन टोल प्लाजा को बंद करने या नियमों के तहत संचालित करने को लेकर स्थानीय विधायक, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण लगातार आंदोलनरत हैं। ग्रामीणों की मांग है कि:
  • तुरुप और हेसल जैसे नियम-विरुद्ध टोल प्लाजा की समीक्षा कर उन्हें हटाया जाए।
  • 20 किमी के दायरे में आने वाले सभी गांवों के वाहनों का निशुल्क आवागमन सुनिश्चित हो।
  • दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में तुरंत फुट ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण कराया जाए।
यदि एनएचएआई और जिला प्रशासन ने समय रहते इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में रांची रिंग रोड पर एक बड़े जन-आंदोलन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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