Haridwar : योग गुरु बाबा रामदेव ने भाजपा सांसद कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते। हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने कंगना पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के लोग उनके योगदान को जानते हैं, इसलिए वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।
उन्होंने कहा, “मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता।”
कंगना विवाद पर रामदेव ने क्या कहा?
हरिद्वार में पत्रकारों ने जब बाबा रामदेव से कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उनका क्या योगदान रहा है।
इसके बाद उन्होंने कंगना का नाम लिए बिना उन्हें ‘ओछे लोग’ कहते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। रामदेव ने इस मामले को आगे बढ़ाने से भी इनकार किया।
‘एक देश, एक चुनाव’ का किया समर्थन
बाबा रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर शिक्षा और विकास पर पड़ता है।
उनके मुताबिक देश में चुनाव पूरे साल चलते रहते हैं और हर कुछ महीनों में किसी न किसी स्तर पर चुनाव होता है। उन्होंने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विकास की गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामे या व्यवधान का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।
भारत को 2040 तक विकसित राष्ट्र बनाने की इच्छा
रामदेव ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन उनकी इच्छा है कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए।
उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अर्थव्यवस्था और कृषि समेत कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत बताई। रामदेव के मुताबिक सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है और आने वाले समय में भी काम जारी रहेगा।
बच्चों को आंदोलनों में आगे करने पर जताई आपत्ति
रामदेव ने विरोध-प्रदर्शनों में छोटे बच्चों को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पांच, सात और दस साल के बच्चों तक को आंदोलनों में शामिल कर रहे हैं और उनसे पुलिस थानों, एसपी तथा जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालयों का घेराव करने और सड़कों पर खड़े होने के लिए कह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। हालांकि, नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं किया जाना चाहिए।
वंदे मातरम पर भी रखी अपनी बात
‘वंदे मातरम’ को लेकर बाबा रामदेव ने कहा कि भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में मानना देश की आस्था और संस्कृति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि भारत माता उनके लिए ज्ञान, आस्था, मंदिर, पूजा, कर्तव्य, उद्देश्य, मंजिल और धर्म का केंद्र हैं। रामदेव ने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम’ में देवी-देवताओं, मठों या मंदिरों के संदर्भ को लेकर सवाल उठाते हैं, उन्हें संस्कृत और उसके अर्थ को बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है।
लोकतंत्र और देशहित पर रामदेव का जोर
बाबा रामदेव ने अपने संबोधन में लोकतंत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अर्थव्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशहित को राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर रखा जाना चाहिए और लोकतांत्रिक व्यवस्था को व्यवधान का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।




