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Home»Adda More..»पेट, पीठ और पैरों के दर्द में असरदार है ‘टिड्डी मुद्रा’
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पेट, पीठ और पैरों के दर्द में असरदार है ‘टिड्डी मुद्रा’

टिड्डी मुद्रा यानी शलभासन न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव कम कर समग्र फिटनेस में सुधार लाता है।
By Samsul HaqueNovember 7, 20252 Mins Read
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Health News: ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने से अगर पीठ या पैर दर्द करने लगते हैं, तो योग में इसका असरदार समाधान है — शलभासन या टिड्डी मुद्रा। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह एक ऐसा आसन है जो रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है, पेट की मांसपेशियों को टोन करता है और पूरे शरीर की फिटनेस को बढ़ाता है।

शलभासन के फायदे: दर्द से राहत और वजन पर नियंत्रण

योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से टिड्डी मुद्रा का अभ्यास करने से रीढ़ की मजबूती, पाचन तंत्र में सुधार और वजन नियंत्रण जैसे कई फायदे मिलते हैं। यह आसन न केवल पीठ दर्द को कम करता है, बल्कि पेट और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है। साथ ही, यह कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है और अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद करता है। महिलाओं के लिए भी यह आसन बेहद फायदेमंद माना गया है — यह पीरियड्स से जुड़ी तकलीफों को कम करता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।

शलभासन करने की विधि और सावधानियां

शलभासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेटें, पैरों को सीधा रखें और हाथों को शरीर के साथ लगाएं। अब गहरी सांस लेते हुए सिर, छाती, हाथ और पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं। इस दौरान शरीर टिड्डी जैसी आकृति बनाता है। इस स्थिति में 10 से 20 सेकंड तक रुकें, फिर धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में लौट आएं। अभ्यास के दौरान केवल पेट और कमर का हिस्सा जमीन को छूना चाहिए। हालांकि, गर्भवती महिलाएं, हर्निया, अल्सर या हार्ट प्रॉब्लम से पीड़ित लोग इसे बिना डॉक्टर या योग प्रशिक्षक की सलाह के न करें।

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