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गले में सरकारी पहचान पत्र, व्यवहार पर सवाल: नशे की हालत में प्रखंड कर्मी के दुर्व्यवहार का आरोप

चैनपुर। चैनपुर प्रखंड मुख्यालय में नौ सितंबर की शाम एक प्रखंड कर्मी के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि प्रखंड कर्मी सहाबीर गोप, जो चपरासी के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं, शाम करीब साढ़े चार बजे कथित रूप से

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चैनपुर। चैनपुर प्रखंड मुख्यालय में नौ सितंबर की शाम एक प्रखंड कर्मी के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि प्रखंड कर्मी सहाबीर गोप, जो चपरासी के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं, शाम करीब साढ़े चार बजे कथित रूप से नशे की हालत में कार्यालय परिसर में मौजूद थे और लोगों के साथ दुर्व्यवहार एवं गाली-गलौज कर रहे थे।

घटना के दौरान मौजूद लोगों के अनुसार, कर्मी का व्यवहार सामान्य नहीं लग रहा था। कथित स्थिति को देखते हुए कुछ लोगों ने उनसे बातचीत करने से भी दूरी बनाए रखी। हालांकि, संबंधित व्यक्ति के नशे में होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच या सक्षम अधिकारी की आधिकारिक रिपोर्ट से ही हो सकती है।

मामले को लेकर एक और सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि घटना के समय संबंधित कर्मी के गले में झारखंड सरकार का पहचान पत्र भी लटका हुआ था। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीन व्यवहार करता है, तो इससे आम जनता के बीच सरकारी कार्यालयों की कार्यसंस्कृति को लेकर गलत संदेश जा सकता है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संबंधित कर्मी के व्यवहार को लेकर पूर्व में भी शिकायतें सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की बातें भी पहले सामने आई थीं। हालांकि, इन पूर्व शिकायतों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

सरकारी कार्यालय में आम लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी कर्मचारी पर नशे की हालत में ड्यूटी करने या आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप गंभीर विषय माना जा सकता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।

अब मुख्य सवाल यह है कि क्या प्रखंड प्रशासन इस मामले की जांच कराएगा? क्या संबंधित कर्मी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा? यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या विभागीय स्तर पर कार्रवाई होगी?

प्रशासन का पक्ष: खबर लिखे जाने तक प्रखंड प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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