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सफायर इंटरनेशनल स्कूल का वो ‘रहस्य’ जो CBI भी नहीं सुलझा सकी

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के चर्चित सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र बिनय कुमार महतो की मौत का रहस्य अब इतिहास के पन्नों में एक ‘अबूझ पहेली’ बनकर दर्ज होने की कगार पर है। जिस मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था और जिसके

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के चर्चित सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र बिनय कुमार महतो की मौत का रहस्य अब इतिहास के पन्नों में एक ‘अबूझ पहेली’ बनकर दर्ज होने की कगार पर है। जिस मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था और जिसके न्याय के लिए एक पिता ने सालों तक अदालतों के चक्कर काटे, उस पर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।

3 मिनट 48 सेकंड का वो घातक अंतराल

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के तकनीकी पहलू किसी थ्रिलर फिल्म की तरह लगते हैं, लेकिन इनका अंत बेहद दुखद है। जांच के अनुसार, 5 फरवरी 2016 की कड़कड़ाती ठंड वाली रात को 1:01:14 बजे बिनय अपने बॉयज हॉस्टल से बाहर निकला। सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक गणना के अनुसार, ठीक 1:05:02 बजे वह स्टाफ क्वार्टर (विंग-ए) से नीचे गिर गया। यानी हॉस्टल से निकलने और मौत के बीच केवल 3 मिनट 48 सेकंड का फासला था। सीबीआई का दावा है कि इस दौरान कैमरों में बिनय के आगे या पीछे कोई दूसरा संदिग्ध व्यक्ति नजर नहीं आया। इसी आधार पर एजेंसी ने इसे ‘एक्सीडेंटल डेथ’ यानी एक हादसा होने की संभावना जताई है।

इंसाफ की उम्मीद और सीबीआई की विफलता

बिनय के पिता मनबहाल महतो ने जब झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, तब उन्हें उम्मीद थी कि सीबीआई उस सच को सामने लाएगी जिसे स्थानीय पुलिस नहीं देख पाई। जुलाई 2022 में जांच हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने घटनास्थल का कई बार ‘रिक्रिएशन’ किया, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद ली और स्कूल के चप्पे-चप्पे को खंगाला। लेकिन चार साल की गहन जांच के बाद एजेंसी इस नतीजे पर पहुंची है कि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता या हत्या की साजिश का कोई ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है।

एक पिता का संघर्ष और भविष्य की राह

यह क्लोजर रिपोर्ट न केवल जांच एजेंसी की सीमाओं को दर्शाती है, बल्कि एक ऐसे सिस्टम पर भी सवाल उठाती है जहाँ एक रसूखदार स्कूल के भीतर हुई छात्र की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। सीबीआई ने विशेष अदालत से इस रिपोर्ट को स्वीकार करने का अनुरोध किया है, लेकिन न्याय का दरवाजा अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

अब सबकी नजरें अदालत के रुख पर टिकी हैं। यदि पीड़ित परिवार इस रिपोर्ट के खिलाफ ‘प्रोटेस्ट पिटीशन’ (विरोध याचिका) दायर करता है, तो अदालत सीबीआई को फिर से जांच करने या किसी नए बिंदु पर गौर करने का आदेश दे सकती है।

सवाल उठता है कि क्या बिनय को कभी न्याय मिलेगा? या फिर 5 फरवरी की वह रात हमेशा के लिए रांची के सबसे बड़े अनसुलझे रहस्यों में शुमार हो जाएगी?

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