Ranchi: झारखंड में ग्रामीण इलाकों तक स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने की मुहिम को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार सख्त रुख अपना रही है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने नेपाल हाउस स्थित विभागीय कांफ्रेंस हॉल में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राज्य की जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। समीक्षा बैठक में विशेष रूप से धनबाद अंचल के अंतर्गत आने वाली तेनुघाट बहु-ग्रामीण जलापूर्ति योजना और एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि रुकी हुई और लंबित योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन योजनाओं में अब तक काम शुरू नहीं हो सका है, वहां अगले 15 दिनों के भीतर हर हाल में निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए। मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम शुरू न करने वाले संवेदकों (ठेकेदारों) के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, काम में लापरवाही या ढिलाई बरतने वाले विभागीय अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी और उन पर भी कार्रवाई होगी।
योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए मंत्री ने एक उच्चस्तरीय टीम के गठन का निर्देश दिया, जो सभी योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करेगी। उन्होंने अधिकारियों को डेस्क वर्क से बाहर निकलकर क्षेत्र भ्रमण को प्राथमिकता देने की सलाह दी, ताकि ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी पेयजल से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान निकाला जा सके। मंत्री ने दोहराया कि जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य राज्य के हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित और नल से नियमित जल उपलब्ध कराना है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक के दौरान गोमिया विधानसभा क्षेत्र में ‘घरेलू नल संयोजन’ (FHTC) की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार, गोमिया प्रखंड के कुल 52,689 घरों में से 35,191 घरों में नल कनेक्शन दिया जा चुका है। वहीं कसमार प्रखंड के 18,574 में से 7,499 घरों, पेटरवार के 32,687 में से 21,799 घरों, नावाडीह के 26,625 में से 14,437 घरों और चंद्रपुरा प्रखंड के 11,162 में से 9,834 घरों को नल-जल से आच्छादित कर दिया गया है।
इस बैठक में जल जीवन मिशन के अभियान निदेशक, अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता (PMU), मुख्य अभियंता (CDO), धनबाद के अधीक्षण अभियंता सहित चास एवं तेनुघाट प्रमंडल के कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंता मुख्य रूप से मौजूद रहे।



