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AI की सुनामी में उड़े खरबों डॉलर! मात्र 48 घंटे में सिलिकॉन वैली को लगा बड़ा झटका

Washington, (US): शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मची दीवानगी अब डर में बदलती नजर आ रही है। पिछले 48 घंटों के भीतर सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों की बाजार कीमत से सैकड़ों अरब डॉलर स्वाहा हो गए हैं। विशेष रूप से सॉफ्टवेयर

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Washington, (US): शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मची दीवानगी अब डर में बदलती नजर आ रही है। पिछले 48 घंटों के भीतर सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों की बाजार कीमत से सैकड़ों अरब डॉलर स्वाहा हो गए हैं। विशेष रूप से सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने पूरी दुनिया के बाजार को हिला कर रख दिया है। आंकड़ों के अनुसार, सॉफ्टवेयर आधारित ‘आईशेयर्स ईटीएफ’ (iShares ETF) की वैल्यू महज सात दिनों में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर कम हो गई है।

एक छोटे से ऐलान ने बिगाड़ा खेल

इस गिरावट की शुरुआत एआई स्टार्टअप ‘अंथ्रोपिक’ (Anthropic) के एक छोटे से ऐलान से हुई। कंपनी ने कानूनी कार्यों (Legal Sector) के लिए अपना नया एआई टूल लॉन्च किया है। हालांकि यह कोई बहुत बड़ा तकनीकी धमाका नहीं था, लेकिन निवेशकों को डर है कि जिस तरह एआई ने कोडिंग की दुनिया बदल दी, वैसे ही अब यह सेल्स, मार्केटिंग और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में स्थापित कंपनियों के बिजनेस मॉडल को खत्म कर सकता है।

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धराशायी हुए दिग्गज: गूगल से लेकर इंफोसिस तक असर: गिरावट का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा:

  • अल्फाबेट (गूगल): एआई पर बढ़ते खर्च के कारण शेयरों में गिरावट आई।

  • आर्म होल्डिंग्स: कमजोर कमाई के अनुमान ने निवेशकों को डराया।

  • भारतीय कंपनियां: लंदन स्टॉक एक्सचेंज के साथ-साथ भारत की दिग्गज आईटी कंपनी TCS और Infosys के शेयरों में भी बिकवाली देखी गई।

बढ़ रहा है कर्ज का संकट

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में करीब 17.7 अरब डॉलर के अमेरिकी टेक लोन संकट के स्तर (Distress Level) पर पहुंच गए हैं। यह उन बैंकों के लिए भी चिंता का विषय है जिन्होंने इन सॉफ्टवेयर कंपनियों को भारी कर्ज दिया है।

क्या यह सिर्फ एक डर है?

दिलचस्प बात यह है कि सेल्सफोर्स (Salesforce) और सर्विसनाउ (ServiceNow) जैसी बड़ी कंपनियों ने अभी तक एआई की वजह से कोई वास्तविक वित्तीय नुकसान नहीं झेला है। उनकी कमाई स्थिर है और ग्राहक भी बने हुए हैं। इसके बावजूद, बाजार में व्याप्त यह अस्थिरता दर्शाती है कि भविष्य में एआई की रेस में कौन टिकेगा और कौन बाहर होगा, इसे लेकर निवेशक अब बेहद सतर्क हो गए हैं।

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