New Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देश भर के अपने सभी संबद्ध स्कूलों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि छात्रों के नाम, जन्मतिथि (DOB) और अन्य व्यक्तिगत जानकारी में किसी भी स्तर पर गलती नहीं होनी चाहिए। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के बाद जारी होने वाली अंकतालिका (Marksheet) और उत्तीर्ण प्रमाण पत्र में दर्ज विवरण पूरी तरह सटीक होना अनिवार्य है। इसके लिए स्कूलों और अभिभावकों को कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक कई स्तरों पर रिकॉर्ड की गहन जांच करने और समय रहते सुधार करने का अवसर दिया जाता है।
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स्कूल रिकॉर्ड से टीसी तक मिलान
CBSE के अनुसार, किसी भी छात्र का डेमोग्राफिक विवरण सबसे पहले उसके स्कूल रिकॉर्ड में शत-प्रतिशत सही होना चाहिए। इसमें छात्र का मूल एडमिशन फॉर्म, स्कॉलर रजिस्टर और एडमिशन-विड्रॉल रजिस्टर शामिल हैं। स्कूल द्वारा जारी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) में भी यही जानकारी दर्ज होनी चाहिए। कक्षा 9वीं के रजिस्ट्रेशन के समय स्कूल और पेरेंट्स को छात्र की पूरी जानकारी को सत्यापित (Verify) करना होता है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बोर्ड की ओर से करेक्शन विंडो भी खोली जाती है, ताकि किसी मानवीय त्रुटि को तुरंत सुधारा जा सके।
LOC और एडमिट कार्ड पर अंडरटेकिंग
बोर्ड ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिया है कि रजिस्ट्रेशन कार्ड डाउनलोड कर छात्रों और उनके माता-पिता को जांच के लिए दिए जाएं। कक्षा 10वीं और 12वीं की लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (LOC) सबमिट करने से पहले स्कूल पूरे डेटा की पेरेंट्स से पुष्टि कराएंगे। परीक्षा से पहले जारी होने वाले एडमिट कार्ड में दर्ज विवरण को छात्र, अभिभावक और स्कूल प्रिंसिपल तीनों को जांचना होगा। इसके लिए संबंधित पक्षों से जानकारी के सही होने का अंडरटेकिंग (घोषणा पत्र) लिया जाता है। इसके अलावा रिजल्ट घोषित होने से पहले भी स्कूल डेमोग्राफिक डिटेल्स में सुधार के लिए बोर्ड को औपचारिक अनुरोध भेज सकते हैं।
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अधूरी रिक्वेस्ट सीधे होगी खारिज
बोर्ड ने चिंता जताई है कि कई स्कूलों द्वारा भेजी जाने वाली करेक्शन रिक्वेस्ट में गंभीर कमियां पाई जाती हैं। कई मामलों में स्कूल जरूरी साक्ष्य नहीं भेजते या छात्र के पिछले स्कूल के प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते। कई बार जमा किए गए दस्तावेज अस्पष्ट होते हैं या उन पर अत्यधिक कटिंग होती है। बोर्ड द्वारा अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने पर स्कूल समय पर जवाब नहीं देते, जिससे मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है। CBSE ने साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी अधूरे अनुरोध को बिना किसी विचार के सीधे खारिज कर दिया जाएगा।




