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अंधविश्वास ने लील ली सोयना मुंडा की जिंदगी, हत्यारा भी निकला आखिर घरवालें ही?

Seraikela-Kharsawan News: सरायकेला–खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र के पहाड़ी गांव मुटुदा में हुई सोयना मुंडा हत्या की गुत्थी पुलिस ने शुक्रवार को सुलझा ली। शुरुआत में यह मामला किसी अज्ञात हमलावर की करतूत लग रहा था, लेकिन जब पुलिस ने तह तक जाकर पड़ताल

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Seraikela-Kharsawan News: सरायकेला–खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र के पहाड़ी गांव मुटुदा में हुई सोयना मुंडा हत्या की गुत्थी पुलिस ने शुक्रवार को सुलझा ली। शुरुआत में यह मामला किसी अज्ञात हमलावर की करतूत लग रहा था, लेकिन जब पुलिस ने तह तक जाकर पड़ताल की, तो कहानी बिल्कुल अलग निकली।

अंधविश्वास ने ले ली जान

जांच में सामने आया कि 57 वर्षीय सोयना मुंडा की हत्या उसके अपने ही परिवार ने की। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि मृतक के भाई हागड़ो मुंडा और उसके दो भतीजे- 45 वर्षीय पगला मुंडा और 23 वर्षीय मोहन मुंडा- काफी समय से अंधविश्वास में जी रहे थे। गांव में होने वाली छोटी–मोटी बीमारियों और परेशानियों के लिए वे सोयना को “डायन” मानने लगे थे। इसी भ्रम ने उन्हें इतने खतरनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

झूठी रिपोर्ट दर्ज कर बचना चाहता था परिवार

हत्या को अंजाम देने के बाद हागड़ो मुंडा ने मामले को बाहरी लोगों द्वारा की गई वारदात बताते हुए खुद ही चौका थाना में आवेदन देकर अपराधियों को पकड़ने की मांग की। लेकिन घटनास्थल, बयान और परिस्थितियों ने पुलिस को कहानी की सच्चाई की ओर खींच लिया।

फरसा बरामद, तीनों आरोपी गिरफ्तार

चौका थाना प्रभारी बजरंग महतो और उनकी टीम ने तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से जांच की। जब पुलिस ने भतीजे मोहन मुंडा से सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया और पूरी घटना बता दी। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल फरसा भी बरामद हुआ।
शुक्रवार को तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

गांव में दहशत और अफसोस का माहौल

6 नवंबर की रात हुए इस हत्या ने पूरे मुटुदा गांव को हिला दिया था। स्थानीय लोग कहते हैं कि अंधविश्वास के नाम पर इस तरह की पारिवारिक हत्या समाज के लिए एक कड़वी चेतावनी है।

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