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सिगरेट की पहली कश लेते ही शरीर को नुकसान पहुंचना शुरू

सिगरेट का पहला कश लेते ही फेफड़ों, दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है; कभी-कभार या कम मात्रा में धूम्रपान भी सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है।

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Health Adda: सिगरेट का धुआं पहली बार शरीर के संपर्क में आते ही नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, भले ही उस समय बाहर से कोई स्पष्ट लक्षण नजर न आएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, यह मान लेना पूरी तरह गलत है कि कई वर्षों तक लगातार धूम्रपान न करने तक शरीर सुरक्षित रहता है। सच यह है कि शरीर सिगरेट के धुएं के संपर्क में आते ही तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है। शुरुआती दौर में यह नुकसान इतना सूक्ष्म और धीमा हो सकता है कि व्यक्ति को इसका अहसास नहीं होता, जिसके चलते लोग खुद को फिट समझकर स्मोकिंग जारी रखते हैं।

धुएं के संपर्क में आते ही बढ़ता है ब्लड प्रेशर

जानकारों के मुताबिक, सिगरेट के धुएं की थोड़ी-सी मात्रा भी अंदर जाते ही तुरंत असर दिखाती है। इसके प्राथमिक प्रभावों में दिल की धड़कन (Heart Rate) का तेज होना और ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) का अचानक बढ़ना शामिल है। इसके साथ ही फेफड़ों के नाजुक टिश्यूज में जलन और हल्की सूजन शुरू हो जाती है। समय के साथ यह अनदेखा नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है और कार्डियोवैस्कुलर व सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों का रूप ले लेता है।

लक्षण न दिखने का मतलब सुरक्षा नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्मोकिंग करने वाले को शुरुआती दिनों में खांसी, सांस फूलना या सीने में भारीपन महसूस नहीं हो रहा है, तो इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि उसके अंग सुरक्षित हैं। धूम्रपान का असर केवल दशकों बाद ही दिखेगा, ऐसा सोचना भ्रम है। कम उम्र में भी इसके लक्षण सामने आ सकते हैं, जैसे कि सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, स्टैमिना तेजी से गिरना, लगातार थकान, बार-बार सीने में इंफेक्शन होना और गले में खराश रहना। यदि आराम की स्थिति में भी सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सोशल स्मोकिंग भी नहीं है सुरक्षित

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि दिन में केवल एक सिगरेट पीने या पार्टियों में कभी-कभार दोस्तों के साथ ‘सोशल स्मोकिंग’ करने से कोई खास नुकसान नहीं होता। हालांकि, मेडिकल साइंस के अनुसार स्मोकिंग का कोई भी सुरक्षित स्तर (Safe Level) नहीं है। दिन में सिर्फ एक सिगरेट पीने से भी व्यक्ति में घातक टॉक्सिन्स पहुंच जाते हैं, जो दिल और फेफड़ों की कार्यप्रणाली को सीधे प्रभावित करते हैं।

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