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जब शरीर ने जवाब दिया तो जज्बे से रच दिया इतिहास! मिलिए बिहार के ‘जलवीर’ से

मधुबनी के पैरा तैराक मो. शम्स आलम शेख जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले एशियन पैरा गेम्स 2026 में तीसरी बार भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

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Patna: हौसले अगर फौलादी हों तो शरीर की शारीरिक सीमाएं कभी सपनों के आड़े नहीं आ सकतीं। इस कथन को सच कर दिखाया है बिहार के अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक मो. शम्स आलम शेख ने। विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए शम्स आलम ने एक बार फिर इतिहास रचा है। उनका चयन लगातार तीसरी बार एशियन पैरा गेम्स के लिए भारतीय दल में हुआ है। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले एशियन गेम्स और पैरा गेम्स 2026 में वे देश का मान बढ़ाने उतरेंगे। इससे पूर्व वे 2018 में जकार्ता और 2022 में हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में भी तिरंगा लहरा चुके हैं।

एशियन गेम्स में बिहार की 120% बढ़ी भागीदारी

इस बार जापान में होने वाले महाकुंभ में बिहार की भागीदारी में 120 प्रतिशत का अभूतपूर्व उछाल आया है। वर्ष 2023 के हांगझोऊ खेलों में जहां बिहार से सिर्फ 5 खिलाड़ी शामिल हुए थे, वहीं इस बार 6 पैरा एथलीट्स सहित कुल 11 खिलाड़ी भारतीय दल का हिस्सा हैं।

दल में पैरा एथलेटिक्स से शैलेश कुमार और सोमन राणा, पैरा पावरलिफ्टिंग से झंडू कुमार, पैरा स्विमिंग से शम्स आलम, पैरा बैडमिंटन से प्रमोद भगत और उमेश विक्रम कुमार शामिल हैं। वहीं रग्बी से गुड़िया व आरती कुमारी, सेपक टाकरा से बॉबी तथा क्रिकेट से स्टार बल्लेबाज ईशान किशन और युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

स्पाइन ट्यूमर से व्हीलचेयर और फिर वर्ल्ड रिकॉर्ड

बिहार के मधुबनी जिले के रथौस गांव में जन्मे शम्स आलम बचपन से ही खेलों के प्रति जुनूनी थे। उन्होंने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल करने के साथ मैकेनिकल इंजीनियरिंग और एमबीए की उच्च शिक्षा पूरी की। साल 2010 में उनकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में ट्यूमर का पता चला। सर्जरी तो हुई, लेकिन गंभीर मेडिकल कॉम्प्लिकेशन के चलते उनके दोनों पैर हमेशा के लिए बेजान हो गए और वे व्हीलचेयर पर आ गए।

इस गहरे आघात के बावजूद शम्स ने हार नहीं मानी। रिहैबिलिटेशन के दौरान पैरा तैराक राजाराम घाग से मिली प्रेरणा के बाद उन्होंने 2012-13 से जल क्रीड़ा को अपना नया हथियार बनाया। साल 2017 में खुले समुद्र में 8 किलोमीटर तैरकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद पटना में गंगा नदी के शिव घाट दीघा से लॉ कॉलेज घाट तक 13 किलोमीटर तैरकर उन्होंने दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मनवाया। 2019 में पोलैंड वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराया।

सरकारी प्रोत्साहन और युवाओं को संदेश

बिहार खेल रत्न और कर्ण इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित शम्स आलम वर्तमान में राज्य सरकार की उत्कृष्ट खिलाड़ी नियोजन नीति के तहत वित्त विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। शम्स का कहना है कि पंचायत स्तर पर स्पोर्ट्स क्लब, खेल मैदान और छात्रवृत्ति योजनाओं से राज्य में प्रतिभाएं निखर रही हैं। युवाओं को अब खेलों को पूर्णकालिक करियर के रूप में अपनाना चाहिए क्योंकि सरकार का तंत्र हर स्तर पर एथलीट्स के साथ मजबूती से खड़ा है।

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