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रामगढ़ प्लांट ब्लास्ट: 28 घंटे बाद मुआवजे पर बनी सहमति; परिजनों को 31-31 लाख

रामगढ़ के पावर प्लांट में ब्लास्ट से तीन इंजीनियरों की मौत के बाद 28 घंटे तक चला गतिरोध, देर रात 31-31 लाख मुआवजे पर बनी सहमति।

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Ramgarh: रामगढ़ के बरकाकाना ओपी क्षेत्र स्थित सीमेंट एंड इस्पात के पावर प्लांट में हुए भीषण ब्लास्ट के बाद करीब 28 घंटे तक चला गतिरोध देर रात मुआवजे पर सहमति बनने के साथ खत्म हुआ। हादसे में जान गंवाने वाले तीन इंजीनियरों के परिजनों को कुल 31-31 लाख रुपये मुआवजा देने पर फैक्ट्री प्रबंधन सहमत हुआ। इसके बाद तड़के करीब 3 बजे 30-30 लाख रुपये के चेक और अंतिम संस्कार के लिए 1-1 लाख रुपये नकद दिए गए।

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रात 11:30 बजे टरबाइन में हुआ जोरदार ब्लास्ट

शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे पावर प्लांट में नाइट शिफ्ट के दौरान इंजीनियर कंट्रोल रूम/केबिन में ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान पावर प्लांट की टरबाइन में अचानक जोरदार धमाका हुआ। ब्लास्ट के बाद वहां आग लग गई और चार इंजीनियर इसकी चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए।

हादसे में तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल है। प्रारंभिक जानकारी में ओवरहीटिंग और पैनल सिस्टम फेल होने की बात सामने आई है। फैक्ट्री कर्मियों ने कंट्रोल रूम के एसी के कई दिनों से खराब होने और तापमान को लेकर प्रबंधन से शिकायत किए जाने का भी दावा किया है। हालांकि हादसे की वास्तविक तकनीकी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

तीन इंजीनियरों की मौत के बाद बढ़ा आक्रोश

हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन घायलों और अन्य प्रभावित लोगों को रांची लेकर गया, जहां चिकित्सकों ने तीन इंजीनियरों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मृतकों के शवों को रिम्स ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

गढ़वा निवासी इंजीनियर अभिषेक पांडेय के शव का पोस्टमार्टम रिम्स, रांची में कराया गया। वहीं धनबाद और बोकारो निवासी मृत इंजीनियरों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था। परिजन शवों को वापस प्लांट लेकर पहुंचे।

आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप था कि हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से लंबे समय तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। शाम करीब 4 बजे तक प्रबंधन और परिजनों के बीच बातचीत नहीं होने से नाराजगी और बढ़ गई।

बिजली बंद होने से शव रखने में भी परेशानी

विरोध के दौरान पूरे प्लांट की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इससे शवों को सुरक्षित रखने के लिए लाए गए डीप फ्रीजर भी नहीं चल सके। इसके बाद परिजनों को शवों को एंबुलेंस में एसी चलाकर रखने की व्यवस्था करनी पड़ी।

इस स्थिति ने आंदोलन कर रहे लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी। करीब 28 घंटे तक चले इस गतिरोध के बीच मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर बातचीत का दबाव बढ़ता गया।

रात 1 बजे 31-31 लाख मुआवजे पर बनी सहमति

लगातार बढ़ते विरोध के बीच शाम करीब 5 बजे फैक्ट्री के सीईओ प्लांट पहुंचे। इसके बाद मृतकों के परिजनों, बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, ग्रामीणों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई।

मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर कई दौर की बातचीत चली। आखिरकार देर रात करीब 1 बजे मृत इंजीनियरों के परिजनों को मुआवजा देने पर सहमति बनी। फैक्ट्री प्रबंधन ने प्रत्येक मृत इंजीनियर के परिवार को 31 लाख रुपये देने पर सहमति जताई।

इसके बाद तड़के करीब 3 बजे विधायक की मौजूदगी में प्रबंधन ने मृत इंजीनियरों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये के चेक दिए। इसके अलावा अंतिम संस्कार के लिए प्रत्येक परिवार को 1-1 लाख रुपये नकद दिए गए।

अब पोस्टमार्टम की कार्रवाई होगी

मुआवजे पर सहमति बनने के बाद शवों की इंक्वेस्ट यानी पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। रामगढ़ पुलिस की ओर से यह प्रक्रिया पूरी कराए जाने के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपने की कार्रवाई होगी।

मुआवजे पर समझौते के बाद स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ी है। हालांकि पावर प्लांट में हुए हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कथित लापरवाही को लेकर उठे सवाल अभी बने हुए हैं। हादसे की तकनीकी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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