Patna: बिहार सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय मंत्री श्रीमती रमा निषाद ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक और सामाजिक सशक्तीकरण से जुड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पटना के जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं की जमीनी निगरानी तेज करने को कहा ताकि कोई भी पात्र छात्र लाभ से वंचित न रहे।
कर्पूरी ठाकुर छात्रावासों में मेस, आरओ और सुरक्षा की होगी नियमित जांच
बैठक के दौरान राज्यभर में संचालित जननायक कर्पूरी ठाकुर कल्याण छात्रावासों तथा अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों की व्यवस्थाओं का गहन विश्लेषण किया गया। मंत्री ने निर्देश दिया कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ आरओ पेयजल, सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मी और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा बिना किसी बाधा के मिलनी चाहिए। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चौबीसों घंटे चालू सीसीटीवी, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, पोक्सो (POCSO) व पोश (POSH) समितियों की सक्रियता, आपातकालीन वाहन, एएनएम/जीएनएम की तैनाती और एचपीवी वैक्सीनेशन की प्रगति सुनिश्चित करने को कहा गया।
1.57 करोड़ के लंबित डीसी विपत्रों पर सख्त रुख, जल्द समायोजन का आदेश
वित्तीय मामलों की समीक्षा के क्रम में सामने आया कि विभिन्न जिलों में करीब 1.57 करोड़ रुपये के डीसी (Detailed Contingent) विपत्र लंबे समय से लंबित पड़े हैं। मंत्री ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तुरंत इनके समायोजन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। विशेष रूप से गोपालगंज और लखीसराय जिलों में लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्रों (UC) का त्वरित निष्पादन करने को कहा गया। साथ ही, मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर (पोस्ट-मैट्रिक) छात्रवृत्ति एवं मेधावृत्ति योजनाओं की राशि समय पर छात्रों के खातों में अंतरित करने और सहयोग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध निवारण करने के निर्देश दिए गए।
जिला कल्याण कार्यालयों में बायोमेट्रिक हाजिरी और संसाधनों का विस्तार
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर स्पष्ट कार्य-विभाजन, अभिलेखों का विधिवत प्रभार और बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने पर सहमति बनी। बैठक में मौजूद विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल ने बताया कि जिला कल्याण पदाधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने और नियमित क्षेत्रीय निरीक्षण के लिए आवश्यक वाहन, डाटा एंट्री ऑपरेटर और आईटी कर्मी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों के औचक निरीक्षण में पाई गई किसी भी अनियमितता पर सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।




