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Muzaffarpur:बिहार की राजनीति में एक बार फिर भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री राजू सिंह चर्चा के केंद्र में हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद उन कारणों पर भी चर्चा तेज हो गई है, जिनकी वजह से उन्हें दोबारा मंत्री पद नहीं दिया गया था।
साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक चुने जा चुके राजू कुमार सिंह नीतीश कुमार सरकार में भाजपा कोटे से पर्यटन मंत्री रह चुके हैं। हालांकि हाल के वर्षों में उन्हें मंत्री पद से दूर रखा गया, जिस पर राजनीतिक गलियारों में लगातार सवाल उठते रहे। अब अदालत के फैसले के बाद इसकी एक बड़ी वजह सामने आती दिख रही है।
मामला दिल्ली में आयोजित न्यू ईयर पार्टी से जुड़ा है। आरोप है कि जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में चली गोली से डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। इसी मामले में अदालत ने राजू सिंह को दोषी माना है और उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया है। मामले में सजा को लेकर अगली सुनवाई 9 जून को होगी। वहीं अदालत ने इस केस में राजू सिंह की पत्नी समेत कई अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है।
राजू सिंह का राजनीतिक सफर जितना चर्चित रहा है, उतना ही उनका नाम विभिन्न विवादों में भी सामने आता रहा है। उनके खिलाफ पारू थाना, साहेबगंज थाना, नगर थाना और दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाना समेत कई जगहों पर मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती रही है।
बीते वर्ष राजद नेता तुलसी राय के साथ कथित मारपीट और अपहरण के मामले ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस घटना के बाद राजू सिंह कुछ समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। हालांकि उनका लगातार कहना रहा है कि किसी भी मामले में उनके खिलाफ अब तक दोष साबित नहीं हुआ था।
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राजू सिंह के परिवार की भी राजनीति में सक्रिय भागीदारी रही है। उनकी पत्नी जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं और स्थानीय राजनीति में प्रभावशाली मानी जाती हैं। संपत्ति के मामले में भी राजू सिंह का नाम बिहार के संपन्न नेताओं में गिना जाता है। उनके पास करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्ति होने की जानकारी चुनावी हलफनामों में सामने आती रही है।
अब दिल्ली की अदालत के फैसले के बाद राजू सिंह की राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं। 9 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

