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पड़ोसी देश में नहीं है एक भी महिला लोको पायलट, अब मेट्रो से हुई है शुरुआत

World News: पड़ोसी देश पाकिस्तान में 7700 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा रेल नेटवर्क मौजूद है, जो वहां के बड़े शहरों को जोड़ता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने विशाल नेटवर्क में एक भी महिला लोको पायलट नहीं है। अब जाकर पाकिस्तान

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World News: पड़ोसी देश पाकिस्तान में 7700 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा रेल नेटवर्क मौजूद है, जो वहां के बड़े शहरों को जोड़ता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने विशाल नेटवर्क में एक भी महिला लोको पायलट नहीं है। अब जाकर पाकिस्तान में महिलाओं ने इस क्षेत्र में कदम रखा है, वह भी मेट्रो के जरिए।

लाहौर में चलने वाली ऑरेंज मेट्रो की ड्राइवर निदा सालेह मलिक को पाकिस्तान की पहली महिला ट्रेन (मेट्रो) पायलट माना जा रहा है। खास बात यह है कि देश में यह शुरुआत 37 साल बाद हुई है। दूसरी तरफ भारत में महिलाएं हवाई जहाज, फाइटर प्लेन से लेकर हाई-स्पीड ट्रेन तक चला रही हैं। एशिया की पहली महिला लोको पायलट भी भारत की ही हैं।

साल 1988 में महाराष्ट्र की सुरेखा यादव ने इतिहास रचते हुए भारतीय रेलवे की पहली महिला लोको पायलट बनने का गौरव हासिल किया था। आज सुरेखा यादव वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन चला रही हैं। फिलहाल देश में लगभग 1828 महिला लोको पायलट हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

भारतीय रेलवे में कुल एक लाख से ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं, जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 8.2 प्रतिशत हैं। महिलाएं सिर्फ ट्रेन ही नहीं चला रहीं, बल्कि स्टेशन मास्टर, ट्रैकमैन, गैंगमैन, सिग्नल मेंटेनेंस और गार्ड जैसी जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रही हैं। इतना ही नहीं, देश के कई रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में पूरा स्टाफ केवल महिलाओं का है, जो गर्व की बात है।

उत्तर प्रदेश में महिला लोको पायलटों की संख्या सबसे ज्यादा है, जहां 222 महिलाएं यह जिम्मेदारी निभा रही हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय महिलाएं रेलवे जैसे कठिन माने जाने वाले क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं।

वहीं पाकिस्तान की बात करें तो यहां हाल ही में मेट्रो ड्राइवर बनी महिला को देश की पहली ट्रेन पायलट कहकर प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक पाकिस्तान की मुख्य ट्रेनों को चलाने वाली कोई महिला लोको पायलट नहीं है।

भारत और पाकिस्तान के बीच यह तुलना साफ दिखाती है कि जहां भारत ने महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी का मौका देकर आगे बढ़ाया है, वहीं पाकिस्तान अब जाकर इसकी शुरुआत कर रहा है।

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