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शहबाज की बेबसी: बलूचिस्तान में फेल हुई पाक सेना, अब चीनी पीएलए संभालेगी मोर्चा!

Islamabad, (Pakistan): पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे खतरनाक कूटनीतिक और सुरक्षा संकट से गुजर रहा है। एक तरफ चरमराती अर्थव्यवस्था और दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बेकाबू होती हिंसा ने शहबाज शरीफ सरकार को घुटनों पर ला दिया है। आलम यह है कि जिस

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Islamabad, (Pakistan): पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे खतरनाक कूटनीतिक और सुरक्षा संकट से गुजर रहा है। एक तरफ चरमराती अर्थव्यवस्था और दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बेकाबू होती हिंसा ने शहबाज शरीफ सरकार को घुटनों पर ला दिया है। आलम यह है कि जिस बलूचिस्तान को संभालने में पाक सेना नाकाम रही है, अब वहां चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सीधे दखल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अब उस दहलीज पर है जहां वह बीजिंग की सैन्य मांगों को और अधिक नहीं ठुकरा पाएगा।

कर्ज का जाल और संप्रभुता का सौदा

आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पाकिस्तान अब एक ‘क्लाइंट स्टेट’ बन चुका है। कुल 131 बिलियन डॉलर के बाहरी कर्ज में से अकेले 68.9 बिलियन डॉलर चीन का है। इस भारी आर्थिक बोझ का असर अब रक्षा क्षेत्र में भी दिख रहा है। 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 81 प्रतिशत हथियार चीन से आए हैं। पाकिस्तान की हालत अब एक ‘कमीशन एजेंट’ जैसी हो गई है, जो चीनी कर्ज चुकाने के लिए जे-17 थंडर जैसे चीनी जेट्स की वैश्विक मार्केटिंग करने को मजबूर है।

बलूचिस्तान बना चीन की ‘दुखती रग’

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बीजिंग के लिए जितना महत्वपूर्ण है, बलूच विद्रोहियों के हमले उसके लिए उतना ही बड़ा सिरदर्द। चीनी इंजीनियरों पर होते लगातार हमलों से बीजिंग का सब्र जवाब दे गया है। साल 2025 में हुए एक ‘जॉइंट सिक्योरिटी फ्रेमवर्क’ समझौते के तहत, पाकिस्तान को अपनी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए चीनी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की शर्त माननी पड़ी है।

क्या अब ‘ऑपरेशन’ चीन संभालेगा?

पाकिस्तान सरकार ने ‘अज्म-ए-इस्तेहकाम’ जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये फूंके, लेकिन बलूचिस्तान में विद्रोह की आग और भड़क गई। अब चीन का अविश्वास इस कदर बढ़ गया है कि वह अपनी परियोजनाओं की रक्षा के नाम पर पीएलए (PLA) की सीधी तैनाती का दबाव बना रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह पाकिस्तान की संप्रभुता के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। आर्थिक रूप से चीन का गुलाम बन चुका पाकिस्तान अब रक्षा नीतियों को भी बीजिंग की शर्तों पर बदल रहा है, जो दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

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