New Delhi: UPSC परीक्षा पास करने के बाद भी 958 युवाओं का भविष्य अधर में लटका है। वजह है क्रीमी लेयर का पेच, जहां सवाल माता-पिता की आय और सामाजिक स्थिति के पैमाने का है। अदालती फैसलों और नियमों की उलझन के बीच ये युवा सर्विस अलॉटमेंट का इंतजार कर रहे हैं। सफलता मिली, लेकिन मंजिल अब भी दूर है।
केंद्र सरकार इन उम्मीदवारों को सेवा आवंटित करने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रही है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इन अभ्यर्थियों के मामलों में आगे की प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मांगी है। इन उम्मीदवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले से पहले लागू मानदंडों के आधार पर ओबीसी पात्रता का निर्धारण किया गया था।
क्या है क्रीमी लेयर और पूरा विवाद?
ओबीसी आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व का अवसर देना है। हालांकि, ओबीसी वर्ग के अपेक्षाकृत संपन्न परिवारों को इस आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। ऐसे परिवारों को क्रीमी लेयर के अंतर्गत रखा जाता है। केंद्र सरकार के मौजूदा नियमों के तहत सामान्यतः आठ लाख रुपये सालाना आय की सीमा महत्वपूर्ण है, लेकिन विवाद इस बात पर है कि क्रीमी लेयर तय करते समय केवल आय को आधार बनाया जाए या माता-पिता के पद और सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को दिए फैसले में स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उनकी नौकरी की प्रकृति, पद और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं पर भी विचार करना जरूरी है। खास तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों की पात्रता तय करने में वेतन को ही एकमात्र आधार बनाने पर सवाल उठाया गया।
अभ्यर्थियों की आगे की प्रक्रिया पर असर
इस मुद्दे का संबंध सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता के बच्चों के साथ समान व्यवहार से भी है। अदालत के फैसले के बाद पात्रता निर्धारित करने की प्रक्रिया और पुराने मानदंडों के आधार पर किए गए आकलन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत पैदा हुई है। इसी असमंजस के बीच सिविल सेवा परीक्षा 2025 के 958 अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन प्रभावित हुआ है। सेवा आवंटन में देरी का असर उनकी आगे की नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशिक्षण कार्यक्रम पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाए। अब अभ्यर्थियों की नजर अदालत के अगले निर्देशों पर है, जिनसे उनकी पात्रता और सेवा आवंटन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।




