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“नो सीट-नो वोट” का अल्टीमेटम, पिछड़ा वर्ग अधिकारों पर गरमाई सियासत

West Singhbhum : जिले में पिछड़ा वर्ग के अधिकारों को लेकर सियासत गरमा गई है। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही गोप-गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के नेता रामहरि गोप ने सत्तारूढ़ दल के विधायकों पर कड़ा हमला बोला है। रामहरि गोप ने शुक्रवार

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West Singhbhum : जिले में पिछड़ा वर्ग के अधिकारों को लेकर सियासत गरमा गई है। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही गोप-गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के नेता रामहरि गोप ने सत्तारूढ़ दल के विधायकों पर कड़ा हमला बोला है।

रामहरि गोप ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह सत्र पिछड़ा वर्ग की असली परीक्षा है। समिति ने सत्र से पहले जिले के सभी विधायकों को ज्ञापन सौंपकर पिछड़े वर्ग की उपेक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए थे। उनका आरोप है कि जिले की सरकारी नियुक्तियों में पिछड़ा वर्ग की भागीदारी लगभग शून्य है। यहां तक कि संविदा ठेकेदार और मनरेगा ऑपरेटर जैसे पदों पर भी उन्हें अवसर नहीं मिल पा रहा है।

गोप ने यह भी कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में पिछड़ा वर्ग के छात्रों को पर्याप्त दाखिला नहीं मिल रहा है और आरक्षण समेत कई योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि विधायक निरल पुरती, जगत मांझी, सुखराम उरांव, मंत्री दीपक बिरुवा और सोनाराम सिंकू ने 28 अगस्त तक चलने वाले सत्र में पिछड़ा वर्ग की आवाज नहीं उठाई तो जनता उन्हें आगामी चुनाव में “नो सीट-नो वोट” का संदेश देगी।

गोप ने कहा कि अब पिछड़ा समाज जाग चुका है और केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। समिति की मांग है कि इस सत्र में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाने के लिए विधेयक लाया जाए और हर स्तर पर उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो।

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