Ranchi: राजधानी में प्रतियोगी परीक्षाओं और कक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर रांची नगर निगम सख्त रुख अपनाए हुए है। शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा एवं भवन मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत कई संस्थानों को सील किया गया है। इसी कड़ी में 30 सितंबर 2026 को सील किए गए कोचिंग संस्थानों के प्रबंधकों और शहर के प्रमुख संचालकों ने नगर आयुक्त सुशांत गौरव से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा।
कार्रवाई का मकसद पढ़ाई रोकना नहीं, सुरक्षा सुनिश्चित करना
मुलाकात के दौरान नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने साफ लहजे में कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम का मकसद किसी संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करें। उन्होंने संचालकों से कहा कि वे सीलिंग की कार्रवाई को सजा न मानकर अपने संस्थानों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा को बेहतर बनाने का एक अवसर समझें।
मानक पूरा होने और शपथ-पत्र देने के बाद ही हटेगी सील
बैठक में नगर आयुक्त ने नेशनल बिल्डिंग कोड, झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 और झारखंड भवन उपविधि के तहत सभी जरूरी नियम पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिन संस्थानों में मॉडिफिकेशन या एनओसी लंबित है, वे उसे जल्द पूरा करें। सभी मानक पूरे करने के बाद संचालकों को शपथ-पत्र (Affidavit) जमा करना होगा, जिसके बाद ही डी-सील (Un-sealing) की प्रक्रिया पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
इन 7 मुख्य नियमों का अनुपालन अनिवार्य:
1. फायर एनओसी (Fire NOC): अग्निशमन विभाग से एनओसी और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता।
2. वैध ट्रेड लाइसेंस: रांची नगर निगम द्वारा निर्गत अपडेटेड ट्रेड लाइसेंस।
3. एंट्री एवं एग्जिट: आपात स्थिति के लिए सुरक्षित और पर्याप्त निकासी द्वार।
4. सिटिंग कैपेसिटी: कमरे और भवन के आकार के अनुसार ही बच्चों की बैठने की क्षमता।
5. इवेकुएशन प्लान: आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने का स्पष्ट खाका।
6. भवन सुरक्षा: स्ट्रक्चरल सेफ्टी और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर का कड़ाई से पालन।
7. मॉक ड्रिल: समय-समय पर आपदा प्रबंधन और आग से बचाव के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन।
नगर आयुक्त ने अंत में अपील की कि अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य और जीवन संस्थानों के भरोसे छोड़ते हैं, इसलिए कोचिंग संचालक और लाइब्रेरी प्रबंधन स्वेच्छा से भी सुरक्षा मानकों की समीक्षा करें। निगम ने चेतावनी दी है कि शहर में कोचिंग सेंटरों की जांच का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।




