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कैदियों और भटके युवाओं के पुनर्वास को नई दिशा, प्रोबेशन सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी

सुधारवादी न्याय प्रणाली को मिलेगी मजबूती

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रांची: झारखंड सरकार ने सुधारात्मक न्याय व्यवस्था (Corrective Justice System) को और अधिक सशक्त, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘राज्य प्रोबेशन सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026’ के गठन के प्रस्ताव को विधिवत मंजूरी दे दी गई। इस नीतिगत निर्णय का उद्देश्य राज्य में प्रोबेशन प्रणाली की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करना तथा कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों व बंदियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की प्रक्रिया को गति देना है।

क्या है प्रोबेशन सेवा और क्यों जरूरी था संशोधन?

आधुनिक न्यायशास्त्र में जेल का मकसद केवल सजा देना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार में सुधार कर उसे एक बेहतर नागरिक के रूप में समाज में पुनर्स्थापित करना है। इस पूरी व्यवस्था में प्रोबेशन अधिकारियों (Probation Officers) की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान होती है। प्रोबेशन सेवा मुख्य रूप से उन विचाराधीन बंदियों, पहली बार अपराध करने वालों और बाल सुधार गृहों (Observation Homes) में रहने वाले किशोरों की काउंसलिंग, निगरानी और उनके सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी होती है।
लंबे समय से इस सेवा संवर्ग की नियमावली में समय के अनुरूप बदलाव की मांग की जा रही थी। पूर्व के नियमों में अधिकारियों की सेवा-शर्तों, पदोन्नति के अवसरों और आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक प्रशासनिक ढांचे का अभाव महसूस किया जा रहा था। नई ‘राज्य प्रोबेशन सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026’ के गठन से न केवल इस कैडर के सेवा नियमों और करियर संरचना को स्पष्टता मिलेगी, बल्कि कार्यप्रणाली में पेशेवर दक्षता भी सुनिश्चित होगी।

पुनर्वास और मानवीय संवेदनाओं को मिलेगा बढ़ावा

अदालतों द्वारा प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट के तहत दिए जाने वाले आदेशों का जमीनी स्तर पर अनुपालन कराना प्रोबेशन अधिकारियों का मुख्य जिम्मा होता है। जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की भीड़ (Overcrowding) को कम करने और छोटे-मोटे अपराधों में शामिल युवाओं को कठोर अपराधियों के संपर्क से बचाकर समाज में सकारात्मक भूमिका देने के लिए प्रोबेशन सेवा को सुदृढ़ करना बेहद जरूरी माना जाता है।
कैबिनेट के इस फैसले के बाद राज्य के गृह एवं कारा विभाग के तहत संचालित सुधारात्मक सेवाओं (Correctional Services) को नई ऊर्जा मिलेगी। इसके जरिए जहां एक तरफ अधिकारियों की जवाबदेही और कार्य मूल्यांकन के नए मानक तय होंगे, वहीं दूसरी तरफ कैदियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से जमीन पर उतारा जा सकेगा।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोबेशन सेवा नियमावली में यह संशोधन झारखंड की जेल सुधार नीति (Prison Reforms) और सामाजिक न्याय की दिशा में एक प्रगतिशील कदम साबित होगा, जिससे भटके हुए लोगों को जीवन की दूसरी शुरुआत करने में मदद मिलेगी।
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