फॉण्ट कनवर्टर NEW

नेपाल की 47 ग्लेशियर झीलें बनीं खतरा, कभी भी फट सकता है जल बम

Kathmandu, Nepal: हालिया विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे नेपाल के सामने अब 47 ग्लेशियर झीलों का खतरा एक नए संकट के रूप में खड़ा हो गया है। वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने हिमालयी क्षेत्र में स्थित इन झीलों को बेहद संवेदनशील माना

अपनी भाषा में पढ़ें

Kathmandu, Nepal: हालिया विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे नेपाल के सामने अब 47 ग्लेशियर झीलों का खतरा एक नए संकट के रूप में खड़ा हो गया है। वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने हिमालयी क्षेत्र में स्थित इन झीलों को बेहद संवेदनशील माना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इनमें से किसी भी झील का प्राकृतिक अवरोध टूटता है, तो भारी मात्रा में पानी और मलबा अचानक नीचे नदी घाटियों की ओर आ जाएगा। इससे बड़े स्तर पर जान-माल का नुकसान हो सकता है। इसी वजह से इन झीलों को देश के लिए ‘टाइम बम’ की तरह देखा जा रहा है।

Read more: पल भर में बही 4 मंजिला इमारत और पुल: नेपाल में तबाही के बाद 133 भारतीय लापता!

पहचान की गई इन संवेदनशील झीलों में से 21 झीलें नेपाल की सीमा में हैं, जबकि 25 झीलें सीमा पार तिब्बत के इलाके में स्थित हैं। इन सभी का पानी नेपाल की मुख्य नदियों और सहायक जलधाराओं में गिरता है। अगर इनमें विस्फोट होता है या प्राकृतिक तटबंध टूटते हैं, तो निचले इलाकों में बसे बस्तियां, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं सीधे तौर पर प्रभावित होंगी।

वैज्ञानिक भाषा में इस स्थिति को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) कहा जाता है। इसमें पानी का प्रचंड बहाव कुछ ही पलों में बस्तियों तक पहुंच जाता है। पहाड़ी ढलानों से आते समय यह पानी अपने साथ भारी चट्टानें, मलबा और पेड़ बहा ले आता है, जिससे नुकसान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे हालात में लोगों को संभलने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका तक नहीं मिलता।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट और नेपाल सरकार के अनुसार लोअर बरुन (तल्लोपोखरी), थुलागी, लुमडिंग त्शो, होंगु-दो (चामलांग साउथ), त्सो रोल्पा और इम्जा त्सो जैसी झीलों पर सबसे ज्यादा निगरानी की दरकार है। ये झीलें केवल बर्फ, मिट्टी और पत्थरों के कमजोर अवरोधों के सहारे टिकी हैं, जिनमें जरा सी भी हलचल भारी तबाही ला सकती है।

Read more: आधी रात कांपी जापान की धरती, नींद से जागे लोग; 37 घायल

पूर्वी और मध्य नेपाल के कोशी और बागमती नदी बेसिन सबसे संवेदनशील माने गए हैं। इनमें सोलुखुम्बु, संखुवासभा, दोलखा और सिंधुपालचोक के नदी तटीय इलाके सीधे निशाने पर हैं। इसके अलावा रामेछाप, काव्रेपलानचोक, रसुवा, मनांग, लमजुंग, गोरखा, मुस्तांग, म्यागदी और हुमला जैसे जिलों पर भी खतरा बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि 24 घंटे की निगरानी, समय पर चेतावनी प्रणाली और जलस्तर घटाने के ठोस कदम ही इस संभावित आपदा से बचाव कर सकते हैं।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram