New Delhi: नेपाल में तिब्बत सीमा के समीप आई भीषण फ्लैश फ्लड और प्राकृतिक तबाही के बीच भारत ने राहत व बचाव कार्यों के लिए मानवीय सहायता तेज कर दी है। गुरुवार सुबह दिल्ली के नजदीक गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस से भारतीय वायुसेना के विशाल सी-17 (C-17 Globemaster) सैन्य परिवहन विमान के जरिए 35 टन अतिरिक्त राहत सामग्री नेपाल रवाना की गई। विमान सुबह करीब 9 बजे काठमांडू के लिए रवाना हुआ।
हिंडन से उड़ा C-17 विमान, हेलीकॉप्टर भी स्टैंडबाय पर
यह खेप भारत की ओर से पड़ोसी देश को दी जा रही निरंतर मानवीय सहायता का हिस्सा है। इससे पहले बुधवार रात को भारतीय वायुसेना के सी-130जे (C-130J) विमान से 10 टन जरूरी मेडिकल उपकरण और राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई गई थी।
भारतीय वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर सी-17 और सी-130 विमानों से और भी सहायता भेजी जाएगी। इसके अलावा बाढ़ और भूस्खलन में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने (इवैक्यूएशन) के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को पूरी तरह तैयार रखा गया है।
163 से अधिक मौतें, दवाइयां और अस्थायी शेल्टर भेजे गए
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक कम से कम 163 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। नेपाल-तिब्बत सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
भारत द्वारा भेजी गई राहत सामग्री में निम्नलिखित आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं:
अस्थायी आश्रय (टेंट) और तिरपाल।
गर्म कंबल और हाइजीन किट्स।
सोलर लैंप और आपातकालीन प्रकाश उपकरण।
प्राथमिक उपचार की जरूरी दवाइयां और सर्जिकल सामान।
पीएम मोदी ने दिया हरसंभव सहयोग का आश्वासन
राहत सामग्री भेजे जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर हालात की जानकारी ली। पीएम मोदी ने नेपाल की जनता के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखने की पुष्टि की है। इधर, काठमांडू में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड्का राज पौडेल को बुधवार को पहली खेप की सामग्री औपचारिक रूप से सौंपी। भारतीय दूतावास प्रभावित नागरिकों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर समन्वय कर रहा है।





