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Ranchi : झारखंड सहित कई राज्यों में शीतलहर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ठंड के मौसम में विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
सबसे पहले, शरीर को गर्म रखने के लिए ऊनी कपड़े, जैकेट, मफलर, टोपी और दस्ताने पहनना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि ढीले और परतदार कपड़े पहनना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे रक्त संचार में बाधा नहीं आती और शरीर की गर्माहट लंबे समय तक बनी रहती है। बहुत अधिक ठंड के समय घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। लेकिन यदि किसी कारणवश बाहर जाना पड़े तो सिर, कान और पैरों को ढककर ही निकलें।
ठंड के मौसम में गर्म पेय पदार्थ भी बेहद लाभकारी होते हैं। अदरक की चाय, गर्म दूध, सूप या अन्य गर्म पेय शरीर में गर्माहट पैदा करते हैं। साथ ही पौष्टिक भोजन और विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे संतरा, नींबू, आंवला आदि का सेवन करने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, जिससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
सर्द मौसम में त्वचा अक्सर रूखी होने लगती है। इसलिए मॉइस्चराइजर का नियमित उपयोग जरूरी है। बालों में हल्का तेल लगाने से भी खोपड़ी में नमी बनी रहती है। शरीर को सक्रिय रखने के लिए हल्का-फुल्का व्यायाम भी करना चाहिए, जिससे शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है और रक्त संचार बेहतर होता है।
घर के अंदर गर्म माहौल बनाए रखना भी आवश्यक है। खिड़कियों और दरवाजों को बंद रखें ताकि ठंडी हवा अंदर न आए, लेकिन कमरे में उचित वेंटिलेशन जरूर रखें। हीटर का उपयोग करते समय सावधानी बरतें और उसे बंद कमरे में लंबे समय तक न चलने दें। संभव हो तो धूप निकलते ही कुछ देर शरीर को धूप जरूर दें, इससे विटामिन-डी की कमी भी दूर होती है।
सर्दी से प्रभावित शरीर के हिस्सों पर मालिश करने से बचना चाहिए। यदि त्वचा का कोई हिस्सा सफेद या काला पड़ने लगे या सुन्न महसूस हो, तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह शीतदंश का संकेत हो सकता है, जिसकी समय पर जांच और उपचार जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की यह मार कुछ दिनों तक जारी रह सकती है, इसलिए सावधानियां अपनाकर ही सुरक्षित रहना बेहतर है।

