Health Adda: बाजार में डिटॉक्स टी और सप्लीमेंट्स के नाम पर खूब पैसे वसूले जा रहे हैं, लेकिन सच यह है कि शरीर की सफाई का काम हमारा लिवर और किडनी खुद करते हैं। इन्हें महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि हरी सब्जियां, फल, दालें और पर्याप्त पानी चाहिए। इसलिए शॉर्टकट छोड़िए और खानपान सुधारिए, सेहत अपने आप बेहतर होगी। हालांकि, बाजार में विज्ञापित होने वाली डिटॉक्स डाइट में ‘टॉक्सिन्स’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर अस्पष्ट तरीके से किया जाता है, जबकि हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से खुद को साफ करने की बेहतरीन क्षमता होती है।
सेहत के लिए वरदान है फाइबर
फाइबर हमारी सेहत पर गहरा और सकारात्मक असर डालता है। यह न केवल सूजन को कम करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, बल्कि दिमाग, मूड और सोचने-समझने की क्षमता को भी बेहतर करता है। फाइबर टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियों, कोलन कैंसर और क्रोनिक इन्फ्लेमेशन जैसी कई गंभीर बीमारियों का खतरा घटाता है।
शरीर को साफ करने में फाइबर की भूमिका बेहद अहम होती है:
– मल त्याग को आसान बनाता है: फाइबर मल को बड़ा और नरम बनाता है, जिससे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों का बाहर निकलना आसान हो जाता है और हानिकारक पदार्थ आंतों में कम समय तक टिकते हैं।
– चुंबक की तरह काम करता है: रिसर्च बताती है कि फाइबर एक चुंबक की तरह टॉक्सिन्स और अन्य हानिकारक पदार्थों से चिपककर उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
– लिवर और किडनी की सुरक्षा: यह पित्त अम्लों को बाहर कर कोलेस्ट्रॉल घटाता है और किडनी तथा लिवर की रक्षा करता है, जो शरीर के प्रमुख डिटॉक्सिफाइंग अंग हैं। यह आंतों में हानिकारक बैक्टीरिया को रोकता और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है।
फाइबर के बेहतरीन स्रोत और विविधता
फाइबर की सही मात्रा पाने के लिए पौधों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन सबसे अच्छा विकल्प है। सूखे मेवे (जैसे खुबानी), हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक), दालें और फलियां (जैसे छोले, मसूर, सेम), दलिया, ओट्स (जई) और साबुत गेहूं से बनी चीजें फाइबर से भरपूर होती हैं। नाश्ते में सेब, बेरी, मेवे, बीज, पॉपकॉर्न या भुनी हुई फलियां खाई जा सकती हैं। अपने भोजन में विविधता रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग प्रकार के फाइबर शरीर को अलग-अलग लाभ पहुंचाते हैं।
पानी की पर्याप्त मात्रा है जरूरी
पानी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का सबसे प्राकृतिक माध्यम है। यह किडनी और लिवर को टॉक्सिन्स फिल्टर करने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए, किडनी पानी का उपयोग करके सोडियम और यूरिया जैसे अपशिष्ट बाहर निकालती है। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने पर टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। लंबे समय तक हल्का डिहाइड्रेशन भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश वयस्कों के लिए रोजाना डेढ़ से पौने दो लीटर (लगभग 6 से साढ़े 7 गिलास) पानी पर्याप्त होता है। पानी के अलावा कम मलाई वाला दूध और बिना चीनी वाली चाय व कॉफी भी लिक्विड इंटेक में शामिल किए जा सकते हैं।





