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अब गांव में ही मिलेगा भविष्य! नालंदा का नया डेयरी प्लांट बदलेगा हजारों की तकदीर

नालंदा में 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले दही और लस्सी प्लांट के शिलान्यास से बिहार के डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना से दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी, किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर
नालंदा डेयरी प्लांट

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Nalanda: बिहार में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा जिले में प्रतिदिन 20 मीट्रिक टन क्षमता वाले दही और लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया। इस परियोजना का उद्देश्य दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और डेयरी उद्योग को नई गति देना है।

नालंदा डेयरी परियोजना से क्या होगा फायदा?

नए दही एवं लस्सी प्लांट के शुरू होने से नालंदा डेयरी की प्रसंस्करण क्षमता में बढ़ोतरी होगी। स्थानीय दुग्ध उत्पादकों का दूध आसानी से खप सकेगा और सुधा ब्रांड के दही एवं लस्सी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे बिहार के साथ-साथ उत्तर-पूर्व, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में भी इन उत्पादों की आपूर्ति की जा सकेगी।

डेयरी परिसर में और कौन-सी सुविधाएं विकसित होंगी?

डेयरी उद्योग को बहुआयामी स्वरूप देने के उद्देश्य से कॉम्फेड द्वारा संचालित एचपीसीएल पेट्रोल पंप का भी शिलान्यास किया जाएगा। डेयरी परिसर के पास पेट्रोल पंप बनने से दूध परिवहन में लगे वाहनों को ईंधन के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और परिवहन लागत में कमी आएगी।

इसके साथ ही सुधा कैफेटेरिया भी शुरू किया जाएगा, जहां स्थानीय लोगों, किसानों और राहगीरों को ताजे एवं गुणवत्तापूर्ण सुधा दुग्ध उत्पाद उपलब्ध होंगे।

विभाग के सचिव ने क्या कहा?

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि डेयरी सेक्टर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार बिहार में दही की मांग काफी अधिक है, इसलिए यह प्लांट उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि नए प्लांट से उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद उपलब्ध होंगे और कॉम्फेड के व्यापारिक दायरे का भी विस्तार होगा।

स्थानीय लोगों को कैसे मिलेगा लाभ?

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे दूध की तुलना में दही, लस्सी और अन्य डेयरी उत्पादों का मूल्य अधिक होता है और उनकी शेल्फ लाइफ भी लंबी होती है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परियोजना के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और नालंदा को राज्य के प्रमुख डेयरी हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

परियोजना से जुड़े कर्मचारी अजय प्रसाद ने कहा कि पहले उन्हें रोजगार के लिए लुधियाना जाना पड़ता था, लेकिन अब घर के पास काम मिलने से परिवार के साथ रहना संभव हो पाया है। वहीं स्थानीय निवासी सृजन सन्नी ने इसे नालंदा के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। कर्मचारी प्रियंका कुमारी ने कहा कि महिला होकर अपने जिले में नौकरी करना उनके लिए सुखद अनुभव है और यह परियोजना नालंदा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

डेयरी विकास को मिलेगी नई दिशा

बिहार की बड़ी आबादी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में डेयरी क्षेत्र में हो रहा विस्तार किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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