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शाही लीची का इंतज़ार खत्म! लाल रंग से सजी मुजफ्फरपुर की मंडी, पर दाम सुनकर उड़ जाएंगे होश

Muzaffarpur: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की विश्व प्रसिद्ध ‘शाही लीची’ का इंतजार अब खत्म हो चुका है। अपनी खास मिठास, लाजवाब सुगंध और पतले छिलके के लिए देश-विदेश में मशहूर शाही लीची अब स्थानीय बाजारों में सजने लगी है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों जैसे

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Muzaffarpur: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की विश्व प्रसिद्ध ‘शाही लीची’ का इंतजार अब खत्म हो चुका है। अपनी खास मिठास, लाजवाब सुगंध और पतले छिलके के लिए देश-विदेश में मशहूर शाही लीची अब स्थानीय बाजारों में सजने लगी है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों जैसे स्टेशन रोड और क्लब रोड सहित कई बाजारों में लाल रंग की आकर्षक लीचियां ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही हैं। हालांकि, सीजन की शुरुआती आवक होने के कारण फिलहाल इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं और यह बाजार में 400 रुपये प्रति सैकड़ा (100 पीस) की दर से बिक रही है।

बाजार के स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अभी बागानों से लीची की तुड़ाई बहुत ही सीमित मात्रा में की जा रही है। बाजार में फल की उपलब्धता कम होने और इसके शौकीनों की भारी भीड़ होने के कारण शुरुआती दौर में डिमांड और कीमत दोनों काफी ज्यादा हैं। रोहुआ क्षेत्र के लीची व्यवसायी वीरू साह ने बताया कि शाही लीची का क्रेज लोगों में इस कदर होता है कि सीजन की पहली खेप आते ही लोग ऊंची कीमत पर भी इसे खरीदने को तैयार हैं। यही वजह है कि फिलहाल 400 रुपये सैकड़ा की दर पर इसकी धड़ल्ले से बिक्री हो रही है।

मई के अंत और जून की शुरुआत में मिलेगी राहत

आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि ये ऊंचे दाम बहुत दिनों तक नहीं रहने वाले हैं। कांटी से मुजफ्फरपुर बाजार पहुंचे फल व्यापारी विशाल साह ने जानकारी दी कि बागानों में अब बड़े पैमाने पर तुड़ाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अगले एक सप्ताह के भीतर बाजार में लीची की आवक में भारी तेजी आएगी। व्यापारियों का अनुमान है कि मई के आखिरी सप्ताह और जून के पहले सप्ताह तक बाजार शाही लीची से पूरी तरह पट जाएगा। आवक बढ़ने से इसकी कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिससे यह आम लोगों के बजट में आ सकेगी।

मिठास और मांग में होगी बढ़ोतरी

कृषि विशेषज्ञों और बागान मालिकों के अनुसार, अभी लीची में शुरुआती रंग आया है, लेकिन मई के अंत तक तेज धूप और अनुकूल मौसम के कारण फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाएंगे। इसके बाद लीची का असली रसीलापन और मिठास उभर कर सामने आएगी। पूरी तरह पकने के बाद इसकी गुणवत्ता और सुगंध में और निखार आएगा, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग कई गुना बढ़ जाएगी।

उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर की शाही लीची को जीआई टैग (GI Tag) भी प्राप्त है, जिसके कारण देश के बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के व्यापारी भी यहां डेरा डालने लगे हैं। आने वाले दिनों में रेलवे और हवाई मार्ग से इसकी देशव्यापी सप्लाई तेज होने वाली है।

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