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*राँची।* ओरमांझी थाना पुलिस पर ट्रक चालक से 25 हजार रुपये लेकर वाहन छोड़ने के आरोप की जांच तेज कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने सिल्ली डीएसपी मनीष चंद्र लाल को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। डीएसपी ने थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्रामीण एसपी ने थाना के मुंशी अजीत को निलंबित कर दिया है। ग्रामीण एसपी के अनुसार शुरुआती जांच में मुंशी प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।
ट्रक चालक सतीश तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनका ट्रक छोड़ने के बदले थाना में 25 हजार रुपये की मांग की गई। उन्होंने ऑनलाइन भुगतान की बात कही, लेकिन नकद रुपये देने का दबाव बनाया गया।
चालक का दावा है कि नकद राशि देने के बाद ही ट्रक छोड़ा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे एक कागज पर यह लिखवा लिया गया कि अब उन्हें डायल-112 की सहायता की आवश्यकता नहीं है। चालक ने थाना के मुंशी अजीत, चालक रंजीत तथा तत्कालीन थाना प्रभारी मनोज कुमार पर भी आरोप लगाए हैं।
*रिकवरी एजेंट से बचने के लिए चालक ने डायल-112 पर पुलिस को बुलाया*
डीएसपी मनीष चंद्र लाल ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सभी संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
दूसरी ओर, ओरमांझी थाना प्रभारी मनोज कुमार ने वसूली के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि रविवार शाम फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट ने डीएल-1एलएएम-5146 नंबर अंकित ट्रक को रोका था। रिकवरी एजेंट से बचने के लिए चालक ने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंचकर चालक और रिकवरी एजेंट दोनों को थाना ले आई।
*मुंशी के निलंबन पर सवाल*
थाना में दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि ट्रक का वास्तविक पंजीकरण नंबर डीएल-1एलएएम-5145 है, जबकि वाहन पर 5146 अंकित कर नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई थी। थाना प्रभारी के अनुसार पूछताछ में चालक ने स्वीकार किया कि रिकवरी एजेंट से बचने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर में बदलाव किया गया था। अब सवाल यह है कि थाना प्रभारी पूरे कार्रवाई को सही मानते हैं तो मुंशी निलंबित क्यों हो गया। इस पूरी घटना को वरीय अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। पूरे मामले में डीएसपी स्तर से जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में आगे भी कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिर सकती है।




