रांची: झारखंड के वरिष्ठ विधायक सरयू राय से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में एक बड़ा और नया कानूनी मोड़ सामने आया है। रांची की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी शंभू सिंह को भी अतिरिक्त आरोपित बनाए जाने की अनुमति दे दी है। विशेष न्यायाधीश सार्थक शर्मा की अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए शंभू सिंह के खिलाफ आधिकारिक समन जारी करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले में शंभू सिंह की व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए आगामी 5 अगस्त 2026 की तिथि निर्धारित की है।
मंगलवार को हुई अदालत की कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में शंभू सिंह को मामले में एक अतिरिक्त आरोपित के रूप में शामिल करने का आग्रह किया गया था। अभियोजन ने अदालत को बताया कि इस मामले में अब तक दर्ज किए गए चार महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि विभाग की बेहद गोपनीय संचिका (फाइल) के पन्नों की तस्वीर किसी और ने नहीं बल्कि शंभू सिंह ने ही अपने मोबाइल से खींची थी। अभियोजन का मजबूत तर्क था कि मामले की तह तक जाने और सभी छिपे हुए तथ्यों को उजागर करने के लिए शंभू सिंह को भी इस मुकदमे में आरोपित बनाया जाना बेहद जरूरी है, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
ट्रायल के चरण में है मामला, 12 गवाहियां पूरी
यह बहुचर्चित मामला फिलहाल एमपी/एमएलए की विशेष अदालत में गहन ट्रायल (सुनवाई) के चरण में है। इस केस में अब तक अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) सहित कुल 12 गवाहों की गवाही की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। गौरतलब है कि मई 2022 में स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अवर सचिव की लिखित शिकायत के आधार पर रांची के डोरंडा थाने में विधायक सरयू राय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उस वक्त आरोप लगाया गया था कि स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की सरकारी संचिका के कुछ बेहद गोपनीय पन्नों की कथित तौर पर चोरी की गई और बाद में उन्हें अनाधिकृत रूप से सार्वजनिक कर दिया गया।
क्या था पूरा विवाद?
जांच पूरी होने के बाद अनुसंधान पदाधिकारी सह सब-इंस्पेक्टर नागेश श्रीवास्तव ने करीब ढाई साल की लंबी जांच के बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और सरकारी गोपनीयता अधिनियम से जुड़े प्रावधानों के तहत कोर्ट में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। इस चार्जशीट में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के आप्त सचिव आसिफ एकराम समेत छह लोगों को मुख्य गवाह बनाया गया है।
इस पूरे विवाद की जड़ कोरोना काल से जुड़ी है, जब विधायक सरयू राय ने इन्हीं कथित गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर अपने पद के दुरुपयोग का सीधा आरोप लगाया था। सरयू राय का दावा था कि बन्ना गुप्ता ने कोरोना महामारी के दौरान मिलने वाली ‘कोविड प्रोत्साहन राशि’ का गलत तरीके से लाभ उठाते हुए स्वयं सहित विभाग के करीब 60 कर्मचारियों को इसका भुगतान करवा दिया था। इसी खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके खिलाफ डोरंडा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसका ट्रायल अब अंतिम दौर में चल रहा है।




