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मोरक्को सरकार बैकफुट पर, प्रदर्शनकारियों से बातचीत को तैयार

World News: मोरक्को में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार पांचवे दिन तेज हो गए हैं। राजधानी रबात समेत कई हिस्सों में हिंसा और तोड़फोड़ हुई। सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़ों में तीन लोगों की मौत हो गई, वहीं 350 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

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World News: मोरक्को में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार पांचवे दिन तेज हो गए हैं। राजधानी रबात समेत कई हिस्सों में हिंसा और तोड़फोड़ हुई। सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़ों में तीन लोगों की मौत हो गई, वहीं 350 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

सरकार बातचीत को तैयार

तीन प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद राजनीतिक संकट गहराता दिख रहा है। प्रधानमंत्री अजीज अखन्नौच ने बयान जारी कर कहा कि सरकार दुखी है और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार संवाद करेगी। अजीज ने कहा, “संस्थाओं और सार्वजनिक स्थानों के भीतर संवाद ही समस्याओं का समाधान है।”

गोलीबारी में तीन मौतें, सैकड़ों घायल

गृह मंत्रालय के अनुसार, तटीय शहर अगादिर के बाहर लेकलिया कस्बे में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गोलीबारी हुई जिसमें तीन लोग मारे गए। मंत्रालय का कहना है कि ये मौतें तब हुईं जब उपद्रवी पुलिसकर्मियों से हथियार छीनने की कोशिश कर रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक 354 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हुए। देशभर में 23 प्रांतों में कारों, बैंकों, दुकानों और सार्वजनिक भवनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

नाबालिग सबसे बड़ी संख्या में शामिल

मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया कि प्रदर्शनकारियों में करीब 70 प्रतिशत नाबालिग हैं। ज्यादातर युवा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और संसाधनों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं।

फीफा वर्ल्ड कप खर्च पर सवाल

प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा गुस्सा सरकार द्वारा 2030 फीफा विश्व कप की तैयारियों पर अरबों डॉलर खर्च करने पर है। युवाओं का कहना है कि अस्पतालों और स्कूलों के पास बुनियादी सुविधाओं के लिए फंड नहीं है, लेकिन सरकार खेल आयोजन पर बेहिसाब खर्च कर रही है।
युवाओं का आरोप है कि सरकार विकास की प्राथमिकताओं की अनदेखी कर रही है।

नेपाल जैसी स्थिति की आशंका

विश्लेषकों का मानना है कि लगातार प्रदर्शन और हिंसा से मोरक्को की सरकार नेपाल जैसे हालात में फंस सकती है, जहां बड़े पैमाने पर विरोध ने सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े किए थे।
अब जबकि सरकार पीछे हटकर बातचीत का प्रस्ताव दे रही है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रदर्शनकारी इसकी बात मानते हैं या आंदोलन और उग्र होता है।

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