नई दिल्ली/रांची: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में झारखंड की गूंज प्रमुखता से सुनाई दी। राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और मजदूरों के हितों से जुड़े कई अति-महत्वपूर्ण मुद्दों को पुरजोर तरीके से मंच पर रखा। उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष मनरेगा, ग्रामीण आवास योजनाओं, न्यूनतम मजदूरी और महिला सशक्तिकरण को लेकर कई ठोस सुझाव और मांगें पेश कीं, जो राज्य के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।

मनरेगा बकाये का भुगतान और रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी की मांग

सम्मेलन के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय ने झारखंड के मनरेगा मजदूरों का पक्ष रखते हुए सबसे बड़ी मांग बकाया राशि को लेकर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड का मनरेगा मद में केंद्र के पास लगभग 900 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विशाल राशि का शीघ्र भुगतान किया जाना चाहिए ताकि गरीब मजदूरों को उनके पसीने की कमाई समय पर मिल सके। इसके साथ ही, उन्होंने मनरेगा के तहत मौजूदा 100 दिनों के रोजगार की सीमा को बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए केंद्र से पर्याप्त बजट आवंटित करने की गुजारिश की गई। बढ़ती महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने की भी पुरजोर वकालत की।

आवास योजनाओं में सुधार और ‘अबुआ आवास’ को समर्थन

ग्रामीण क्षेत्रों में हर गरीब के पक्के मकान के सपने को साकार करने के लिए मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की मौजूदा राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर कम से कम दो लाख रुपये करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर (Fabricated Structure) वाले आवास निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित रहें। इसके अतिरिक्त, झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अबुआ आवास योजना’ का जिक्र करते हुए उन्होंने इसमें 90 दिनों के मजदूरी भुगतान को शामिल करने की अहम मांग रखी, जिससे लाभार्थियों को घर बनाने में आर्थिक संबल मिल सके।

महिला सशक्तिकरण और महात्मा गांधी के नाम पर योजनाएं

झारखंड की महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि राज्य की 32 लाख से अधिक महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के लिए एक बेहतर और सुलभ बाजार उपलब्ध कराना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने ग्रामीण उद्योगों की स्थापना पर विशेष जोर दिया ताकि ये महिलाएं आर्थिक रूप से और अधिक स्वतंत्र और सशक्त हो सकें।

सोमवार को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मंत्री ने एक अहम वैचारिक मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकारी योजनाओं से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने केंद्र से मांग की कि ग्रामीण उत्थान और जनहित की नई योजनाएं महात्मा गांधी के नाम से ही शुरू की जानी चाहिए। उनका यह रुख दर्शाता है कि झारखंड सरकार ग्रामीण विकास के साथ-साथ अपने लोकतांत्रिक और वैचारिक मूल्यों को लेकर भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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