Jamshedpur: जमशेदपुर डीडी क्लब चाकूबाजी मामला अब हत्या में तब्दील हो गया है। बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित डबल डाउन (डीडी) क्लब के बाहर शनिवार देर रात हुई चाकूबाजी की घटना में गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह की सोमवार को टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी मौत के बाद पुलिस अब मामले की जांच हत्या की धाराओं के तहत कर रही है। वहीं, इस घटना में गंभीर रूप से घायल प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता के एक अस्पताल में जारी है, जहां उसकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

हिमांशु सिंह की फाइल फोटो।

हिमांशु सिंह आदित्यपुर के हरिओम नगर के निवासी थे। वह टाटा स्टील के सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व कमेटी सदस्य अशोक सिंह के पुत्र थे। घटना के दौरान हमलावरों ने उन पर धारदार हथियार से कई वार किए थे, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। चिकित्सकों के लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

देर रात विवाद के बाद हुई थी चाकूबाजी

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात डबल डाउन क्लब के बाहर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान चाकूबाजी और मारपीट की घटना में हिमांशु सिंह, प्रत्युष सिंह समेत अन्य युवक घायल हो गए।

घायलों को तत्काल टीएमएच पहुंचाया गया, जहां हिमांशु की हालत लगातार गंभीर बनी रही। वहीं, प्रत्युष सिंह को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर कोलकाता भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है।

दो आरोपी गिरफ्तार, 11 लोगों को बनाया गया नामजद

हिमांशु सिंह की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, शहर में भी घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। अब तक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुल 11 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

घटना के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि हमलावरों ने हिमांशु सिंह और प्रत्युष सिंह को पुलिस की पीसीआर वैन से बाहर खींच लिया और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उन पर चापड़ से हमला किया। इसके बावजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी दोनों युवकों को बचाने में सफल नहीं हो सके।

लोगों का कहना है कि यदि पुलिस मौके पर मौजूद थी तो हमलावरों ने खुलेआम वारदात को कैसे अंजाम दिया। साथ ही ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले को लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी लगातार चर्चा हो रही है।

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