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माइक्रो ड्रिप इरीगेशन से झारखंड में बागवानी को नई दिशा, JICA अधिकारियों ने की सराहना

Ranchi : झारखंड में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने वाली ‘झारखंड हॉर्टिकल्चर इंटेंसिफिकेशन थ्रू माइक्रो ड्रिप इरीगेशन (JHIMDI)’ परियोजना का सोमवार को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के उच्चाधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर JICA मुख्यालय टोक्यो से

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Ranchi : झारखंड में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने वाली ‘झारखंड हॉर्टिकल्चर इंटेंसिफिकेशन थ्रू माइक्रो ड्रिप इरीगेशन (JHIMDI)’ परियोजना का सोमवार को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के उच्चाधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर JICA मुख्यालय टोक्यो से आए सहायक निदेशक नाकायामा शोता ने रांची जिले के नामकुम प्रखंड अंतर्गत रामपुर पंचायत के चेने और सरवल गांवों का दौरा किया।

परियोजना के तहत तैयार किए गए प्लॉटों का अवलोकन करते हुए उन्होंने किसानों, विशेषकर महिला कृषकों (दीदियों) से सीधे संवाद किया और उनकी मेहनत को सराहा। इस परियोजना का उद्देश्य माइक्रो ड्रिप इरीगेशन तकनीक के माध्यम से बागवानी को बढ़ावा देना और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाना है।

भ्रमण के दौरान श्री शोता ने खरसिदाग गांव में बहुद्देशीय सामुदायिक केंद्र और सोलर कूल चेम्बर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने इस बात की प्रशंसा की कि किस प्रकार यह सुविधाएं स्थानीय किसानों को उपज के भंडारण और विपणन में मदद कर रही हैं।

श्री शोता ने विशेष रूप से महिला समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, “JHIMDI परियोजना न केवल खेती को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। दीदियों का समर्पण प्रेरणादायक है।”

इस अवसर पर JICA राज्य कार्यालय से मुख्य परिचालन अधिकारी प्रवीण सिंह, परियोजना प्रबंधक पंकज सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक निशिकांत नीरज, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक सुजाता सोनी सहित अन्य तकनीकी स्टाफ एवं अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

JHIMDI परियोजना वर्तमान में रांची जिले के 12 प्रखंडों में चल रही है और यह राज्य सरकार तथा JICA की एक संयुक्त पहल है। इस परियोजना के तहत माइक्रो ड्रिप इरीगेशन तकनीकों का प्रयोग कर जल की बचत के साथ-साथ उत्पादकता में वृद्धि की जा रही है। साथ ही इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार देखा जा रहा है। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास और महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनती जा रही है।

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