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‘एल मेंचो’ की मौत के बाद मेक्सिको में जंग, रोजाना 650 करोड़ का ड्रग खेल

Mexico City: दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग तस्करों में शुमार नेमेसियो ओसेगेरा सर्वांतेस उर्फ ‘एल मेंचो’ की मौत ने मेक्सिको के ड्रग नेटवर्क की डरावनी सच्चाई को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है। यह नेटवर्क सिर्फ तस्करी का जरिया नहीं, बल्कि एक

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Mexico City: दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग तस्करों में शुमार नेमेसियो ओसेगेरा सर्वांतेस उर्फ ‘एल मेंचो’ की मौत ने मेक्सिको के ड्रग नेटवर्क की डरावनी सच्चाई को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है। यह नेटवर्क सिर्फ तस्करी का जरिया नहीं, बल्कि एक समानांतर अर्थव्यवस्था बन चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, मेक्सिको के विभिन्न ड्रग कार्टेल्स से करीब 1,75,000 सक्रिय सदस्य जुड़े हैं, जो इसे देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं (Employers) की सूची में खड़ा करता है।

कमाई का गणित: हर दिन 650 करोड़ रुपये का कारोबार

अवैध ड्रग्स के इस काले बाजार का सटीक आंकड़ा जुटाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अनुमान बताते हैं कि अमेरिकी बाजार में ड्रग्स बेचकर ये कार्टेल्स हर साल 19 से 29 अरब डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) का शुद्ध लाभ कमाते हैं। अगर इसे दैनिक आधार पर देखें, तो यह आंकड़ा 400 से 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। अकेले सीजेएनजी (CJNG) गुट कुल नेटवर्क के 18% हिस्से पर कब्जा रखता है, जबकि सिनलोआ कार्टेल की हिस्सेदारी करीब 9% है।

अमेरिका की 90% सप्लाई पर कब्जा

मेक्सिको अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण दक्षिण अमेरिका और अमेरिका के बीच एक ‘ट्रांजिट हब’ बन गया है। अमेरिका पहुंचने वाली हेरोइन, मेथामफेटामाइन और फेंटेनिल की 70 से 90 फीसदी आपूर्ति इन्हीं कार्टेल्स के हाथ में है। पिछले एक दशक में सिंथेटिक ड्रग ‘फेंटेनिल’ की मांग में 600% की भारी वृद्धि हुई है। कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण अकेले फेंटेनिल से ही ये अपराधी सालाना 1 अरब डॉलर तक कमा रहे हैं।

ड्रोन और एन्क्रिप्टेड तकनीक से लैस अपराधी

आधुनिक दौर में ये कार्टेल केवल हथियारों तक सीमित नहीं हैं। अब ये तस्करी के लिए उन्नत ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली और हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रग्स के अलावा वसूली, ईंधन चोरी और अपहरण जैसी गतिविधियां भी इनके आय के स्रोत हैं। ‘एल मेंचो’ की मौत के बाद भड़की ताजा हिंसा इस बात का प्रमाण है कि नेतृत्व बदलने के बावजूद यह संगठित तंत्र कितना गहरा और खतरनाक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका जैसे देशों में मांग बनी रहेगी, इस सप्लाई चेन को तोड़ना नामुमकिन जैसा है।

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