Patna: ‘खेत बचाओ, जीवन बचाओ’ के संकल्प को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से ज्ञान भवन, पटना में ‘खेत बचाओ अभियान’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार तथा लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसकी अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने की।
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कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘खेत बचाओ अभियान’ सह कृषि जन कल्याण संवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना। साथ ही, उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुँचाने के निर्देश दिए।
प्राकृतिक खेती और उर्वरता संरक्षण पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप इस अभियान का लक्ष्य खेतों की उर्वरता और मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य का संरक्षण करते हुए कृषि को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इसके माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजों की गुणवत्ता और किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीज वितरण या उर्वरक की कालाबाजारी और जमाखोरी में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
स्कूली बच्चों के लिए मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं
मिट्टी के संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार के सभी 38 जिलों के 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इससे विद्यार्थी वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की गुणवत्ता समझ सकेंगे। इस दिशा में पहले ही 160 पीएम श्री उच्च विद्यालयों में ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
रबी सीजन के लिए व्यापक लक्ष्य
अभियान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि शारदीय (खरीफ) मौसम में राज्यभर में 7,275 किसान बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें 6,19,436 किसानों (जिनमें 2,12,610 महिला किसान शामिल थीं) ने भाग लिया। अब वासंतिक (रबी) मौसम 2026-27 में इस अभियान को राज्य के सभी 534 प्रखंडों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके तहत प्रत्येक प्रखंड की कम से कम दो पंचायतों में विशेष जागरूकता शिविर लगाकर 15 से 16 लाख किसानों तक सीधे पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक संचालित होगा।






