शोभायात्रा छप्पन सेट स्थित दुर्गा मंडप से शुरू होकर गोरखा चौक, अंबेडकर चौक और विवेकानंद चौक होते हुए बटन तालाब पहुंची। यहां महिलाओं ने विधि-विधान से कलश में पवित्र जल भरा। इसके बाद सभी श्रद्धालु राजेंद्र चौक और गोरखा चौक होते हुए वापस दुर्गा मंडप पहुंचे। जहां विधिवत कलश स्थापना की गई और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई।
आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है कलश यात्रा
समिति के मुख्य संरक्षक और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कलश शोभायात्रा धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि धर्म का मतलब केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारा और सेवा भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पर्यावरण संरक्षण और जलस्रोतों की स्वच्छता का संकल्प लेने की अपील की।
पूजा मंडप में रोज होगी सुबह-शाम आरती
समिति के मीडिया प्रभारी मेहुल दूबे ने बताया कि नवरात्र के दौरान पूजा मंडप में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होगी। पंडित उदय शंकर मिश्रा के मार्गदर्शन में यजमान मनीष कुमार दूबे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष गौतम दूबे, संरक्षक कपिलदेव सिंह, शोभा सिंह, रितेश सिंह, मनोज सिंह, मेहुल दूबे, शीला देवी, कुसुम देवी, रंजू पांडे, गुड़िया सिंह समेत बड़ी संख्या में समिति के सदस्य और श्रद्धालु मौजूद रहे।



